US-Iran Tension: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जिसने दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति लगातार ईरान को तबाह करने की धमकी दे रहे है, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहा है और लगातार जहाजों को निशाना बना रहा है।

इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, जो सबसे ज्यादा परेशानी बढ़ा सकता है। चलिए आपको बताते है इससे जु़ड़ी सभी अहम जानकारी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गहराया भीषण संकट

बीते कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। माना जा रहा है कि अगर स्थिति ऐसी ही रहती है, तो आने वाले दिनों में भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी टेंशन लगातार बढ़ता जा रहा है।

ईरान ने साफ तौर पर कह दिया है कि जबतक उसकी 7 शर्तें नहीं मानी जाती है, तब तक वह स्ट्रेट ऑफ होर्मजु को बंद रखेगा। जिसका असर अभी दिखना शुरू हो गया है। वहां से गुजर रहे जहाजों पर लगातार हमले की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है।

कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

बता दें कि बीते कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। जबकि कुछ महीने पहले कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन ने स्थिति चिंताजनक बना दी है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85-90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता रहा है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।

यानि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही खुदरा महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो माल ढुलाई, ट्रक परिवहन, हवाई यात्रा और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है।