SCO Summit: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की संभावित मुलाकात को लेकर क्षेत्रीय राजनीति में दिलचस्पी बढ़ सकती है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार की मौजूदगी में दोनों देशों के रिश्तों, सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सबकी नजरें रहेंगी।
गौरतलब है कि सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान भारत के आगे लगातार गिड़गिड़ा रहा है। माना जा रहा है कि एक बार फिर पाक अपना पुराना राग अलाप सकता है।
SCO Summit में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर रहेंगी नजरें
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भारत और पाकिस्तान की भागीदारी एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में 19 और 20 अक्टूबर को होने वाली SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं,
जबकि पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को देखते हुए इस बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों की गतिविधियों पर नजर रहेगी।
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का मुद्दा क्यों अहम?
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों जैसे मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में किसी भी बहुपक्षीय बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को कूटनीतिक नजरिए से देखा जाता है।
भारत SCO जैसे मंचों पर क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग के मुद्दों को उठाने का अवसर प्राप्त करता है। वहीं पाकिस्तान भी सदस्य देशों के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश करता है।
हालांकि, किसी बैठक में दोनों देशों की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि उनके बीच तनाव का समाधान निकल ही आएगा। हालांकि पाकिस्तान की लगातार हरकतों के कारण उसे वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।