Badaun Industrial Corridor: बदायूं के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। गंगा एक्सप्रेसवे के पास जिले का पहला औद्योगिक गलियारा बसाने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए करीब 111.2 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत की जा चुकी है। अब यहां कैंप ऑफिस बनाया जा रहा है और जमीन समतल करने का काम चल रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि दिवाली के बाद निर्माण कार्य में तेजी आएगी और उद्यमियों को प्लॉट आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
गंगा एक्सप्रेसवे के पास कहां बसेगा औद्योगिक गलियारा?
बदायूं जिले की सदर तहसील के बिनावर क्षेत्र में घटपुरी के पास औद्योगिक गलियारा विकसित किया जा रहा है। यह जमीन गंगा एक्सप्रेसवे से करीब एक किलोमीटर दूर और बरेली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित है। इस जगह की सबसे बड़ी खासियत सड़क कनेक्टिविटी है। एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक होने से यहां स्थापित होने वाले उद्योगों को माल की आवाजाही में सुविधा मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने अटल इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर के तहत इस परियोजना की योजना तैयार की है। इसके लिए शासन से 149.03 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
500 किसानों से जमीन खरीदने की प्रक्रिया, 111 हेक्टेयर अधिग्रहण पूरा
औद्योगिक गलियारे के लिए घटपुरी, औरंगाबाद माफी और कुतुबपुर थरा गांवों के आसपास करीब 134.5 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यूपीडा के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 500 किसानों से मौजूदा सर्किल रेट से चार गुना कीमत पर जमीन ली गई है। अब तक लगभग 111.2 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। शेष करीब 23.2 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व महेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक, बाकी जमीन के लिए सर्वे कराकर प्रस्ताव तैयार किया गया है। शेष अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।
दिवाली के बाद क्या बदलेगा? प्लॉट आवंटन की तैयारी
औद्योगिक गलियारे को जमीन पर उतारने के लिए यूपीडा ने शुरुआती काम तेज कर दिया है। फिलहाल कैंप ऑफिस का निर्माण कराया जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद यहां कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके बाद आंतरिक सड़कों के निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। मौके पर मिट्टी एकत्र करने और जमीन समतल करने का काम भी चल रहा है। यूपीडा के प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष कुमार के मुताबिक, दिवाली के बाद उद्यमियों को प्लॉट आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, इसकी वास्तविक शुरुआत निर्माण कार्य और प्रशासनिक तैयारियों की प्रगति पर निर्भर करेगी।
5200 रुपये प्रति वर्ग फुट होगा प्लॉट का रेट
औद्योगिक गलियारे में जमीन खरीदकर उद्योग लगाने की योजना बना रहे उद्यमियों के लिए प्लॉट की कीमत भी तय कर दी गई है। यूपीडा के निदेशक मंडल ने प्लॉट आवंटन के लिए 5200 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर निर्धारित की है। यही दर प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी दर्ज की गई है। उद्यमियों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि प्लॉट की कुल कीमत उसके क्षेत्रफल के हिसाब से तय होगी। इसके अतिरिक्त लागू होने वाले शुल्क और आवंटन की शर्तों की जानकारी संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से लेनी होगी।
फैक्ट्रियां खुलीं तो बदायूं के युवाओं को मिलेगा रोजगार
बदायूं में औद्योगिक गलियारा विकसित होने से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यदि यहां अलग-अलग क्षेत्रों की फैक्ट्रियां स्थापित होती हैं, तो उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन, वेयरहाउसिंग और अन्य सहायक सेवाओं में नौकरियों के अवसर बन सकते हैं।
इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की मजबूरी कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। किसानों को जमीन का मुआवजा मिलने के बाद अब क्षेत्र के लोगों की नजर इस बात पर है कि यहां उद्योग कब स्थापित होते हैं और रोजगार के अवसर कब उपलब्ध होने लगते हैं। हालांकि, हजारों नौकरियों की वास्तविक संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने उद्योग यहां निवेश करते हैं, किन क्षेत्रों की फैक्ट्रियां लगती हैं और उनका उत्पादन कब शुरू होता है।
दातागंज में भी जमीन अधिग्रहण की तैयारी
औद्योगिक विकास से जुड़ी गतिविधियां केवल बिनावर तक सीमित नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक, दातागंज क्षेत्र में भी अलग से भूमि अधिग्रहण कराया जा रहा है। इससे जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन बिनावर और दातागंज की परियोजनाओं की समयसीमा, निवेश और रोजगार क्षमता अलग-अलग हो सकती है।
बदायूं के विकास के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक गलियारा विकसित होने से बदायूं को सड़क कनेक्टिविटी के साथ औद्योगिक निवेश का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय कारोबार, माल परिवहन और रोजगार से जुड़े अवसर बढ़ सकते हैं। फिलहाल परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि करीब 111.2 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा होना है। अब असली परीक्षा बुनियादी ढांचे के निर्माण, प्लॉट आवंटन और उद्योगों को निवेश के लिए आकर्षित करने की होगी। अगर ये चरण समय पर पूरे होते हैं, तो बिनावर क्षेत्र आने वाले वर्षों में बदायूं के औद्योगिक विकास का नया केंद्र बन सकता है।
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