जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS इंटर्न डॉक्टरों के लंबे समय से लंबित स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आखिरकार सरकार ने फैसला ले लिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 12,300 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। नई दर 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इस फैसले में विदेशी मेडिकल संस्थानों से पढ़ाई करने वाले Foreign Medical Graduates (FMGs) को भी शामिल किया गया है।
सरकारी आदेश 21 अक्टूबर को जारी किया गया। इसके तहत इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने अब 12,700 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। यह पुरानी राशि के मुकाबले करीब 103 फीसदी की बढ़ोतरी है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जम्मू-कश्मीर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
सात साल से अटकी थी मांग
इंटर्न डॉक्टरों के मुताबिक, उनका स्टाइपेंड वर्ष 2019 से 12,300 रुपये पर ही बना हुआ था। इस दौरान महंगाई, किराये, खाने-पीने, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन स्टाइपेंड में संशोधन नहीं हुआ। इसी मुद्दे को लेकर जम्मू और राजौरी समेत केंद्रशासित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा था कि वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, वार्डों, ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं में काम करते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली राशि मौजूदा खर्चों के मुकाबले काफी कम है। इंटर्न डॉक्टरों ने अपना मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग की थी। ऐसे में सरकार ने राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये की है, जो उनकी मांग से 5,000 रुपये कम है।
पहले समिति बनी फिर भी निर्णय में हुई देरी
स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए वर्ष 2023 में समिति गठित किए जाने की बात भी सामने आई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से इंटर्न डॉक्टरों में नाराजगी बनी रही। प्रदर्शन और हड़ताल के बीच स्वास्थ्य विभाग तथा सरकार के स्तर पर बातचीत हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी और वित्त विभाग की सहमति के आधार पर औपचारिक आदेश जारी किया गया।
सरकारी आदेश के मुताबिक, संशोधित स्टाइपेंड 1 अक्टूबर से लागू होगा। इससे पात्र इंटर्न डॉक्टरों को नई दर के अनुसार भुगतान मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या राजनीतिक वजह से लिया गया फैसला?
इस फैसले को केवल आर्थिक राहत के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे प्रशासनिक जरूरतों के साथ राजनीतिक और जनसंपर्क से जुड़े पहलू भी हो सकते हैं। लंबे समय से लंबित मांग पर कार्रवाई, प्रदर्शन कर रहे युवा डॉक्टरों की नाराजगी दूर करना और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण वर्ग को राहत देना सरकार के लिए अहम था।
जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में इंटर्न डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनकी हड़ताल लंबी खिंचने पर मरीजों की देखभाल प्रभावित होने का जोखिम भी रहता है। सरकार के लिए आंदोलन समाप्त कराना और अस्पतालों में सामान्य सेवाएं बनाए रखना एक व्यावहारिक प्राथमिकता हो सकती है।
राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला उमर अब्दुल्ला सरकार को यह संदेश देने का अवसर भी देता है कि वह लंबे समय से लंबित मांगों पर कार्रवाई कर रही है। हालांकि, इसे किसी खास राजनीतिक रणनीति या चुनावी लाभ से जोड़ने के लिए स्वतंत्र प्रमाण जरूरी हैं। उपलब्ध तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि फैसला लंबे आंदोलन और मांगों पर बातचीत के बाद आया है।
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इंटर्न डॉक्टरों को कितनी राहत मिलेगी?
स्टाइपेंड में बढ़ोतरी से प्रत्येक पात्र इंटर्न को हर महीने 12,700 रुपये अधिक मिलेंगे। पुरानी दर पर सालाना राशि 1,47,600 रुपये थी, जबकि नई दर पर 12 महीने का कुल स्टाइपेंड 3 लाख रुपये होगा। यानी पूरे 12 महीने नई दर लागू रहने पर सालाना 1,52,400 रुपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी। हालांकि, इंटर्न डॉक्टरों की मूल मांग 30,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड की थी। सरकार के फैसले से उन्हें बड़ी आर्थिक राहत जरूर मिली है, लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारी डॉक्टर इस बढ़ोतरी को अपनी मांगों का पर्याप्त समाधान मानते हैं या नहीं।