नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार 20,अक्टूबर को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह संगठन हिंदू भावना को जगाने और एक संगठित और मजबूत समाज बनाने के लिए काम कर रहा है। इन्हीं मूल्यों ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को अपनी जान जोखिम में डालने के लिए प्रेरित किया।

कैप्टन स्मित का साहस हिन्दू मूल्यों का उदाहरण है

फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार जिन्होंने अपने कॉकपिट में एक हाईजैकिंग की कोशिश को नाकाम कर दिया था, उन मूल्यों का एक उदाहरण हैं जो लोगों को दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार और मूल्य व्यक्ति को दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने की प्रेरणा देते हैं। कैप्टन स्मित मच्छार का साहस इन्हीं मूल्यों का उदाहरण है।

RSS का उद्देश्य समाज को एक सुव्यवस्थित करना

मोहन भागवत ने कहा कि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू भावना को जगाने और पूरे समाज को एक सुव्यवस्थित, संगठित और मजबूत समाज बनाने के लिए काम कर रहा है और इन्हीं मूल्यों ने कैप्टन स्मित मच्छार को अपनी जान जोखिम में डालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ताकत के बिना, दुनिया भर में किसी भी इंसान की ज़िंदगी का गुज़ारा, इज़्ज़त और सुरक्षा मुमकिन नहीं है। इसलिए, एक सुसंगठित और मज़बूत समाज बनाने की वकालत करना या उसके लिए काम करना सभी धर्मों का सम्मान करने की भावना या देश की भावनाकमक एकता के खिलाफ़ नहीं है।

हिंदू सोच और प्रवृति जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही

उन्होंने आगे कहा कि, क्योंकि हिंदू समाज का नज़रिया सबको साथ लेकर चलने वाला है, इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि ऐसी कोशिशें हम सभी के बीच भावनात्मक एकता, अच्छी भावना और अच्छे व्यवहार को ही मज़बूत करेंगी। कैप्टन मच्छर का ज़िक्र करते हुए भागवत ने कहा कि, यही सोच और प्रवृति जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं, कैप्टन स्मित मच्छार को अपनी जान खतरे में डालने और इंसानी ज़िंदगी की रक्षा के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित करती हैं। कैप्टन स्मित ने बताया कि जब भी वह मुश्किल में होते हैं, तो वह हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि वह कॉकपिट अटैक के दौरान भी हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा, जब भी मुझे दर्द होता है, मैं बस हनुमान चालीसा पढ़ता हूं। उस समय भी, मैं सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ रहा था। और मुझे पता है कि भगवान मेरे साथ हैं।

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