Punjab Employees Strike: पंजाब में सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। पुरानी पेंशन, वेतन विसंगतियों और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने जैसी मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल का ऐलान किया है। सरकार ने 21 अक्टूबर को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।
सरकार की बैठक का बहिष्कार क्यों?
साझा मुलाजिम फ्रंट के नेताओं के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में तय हुआ था कि कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा के लिए अक्टूबर के पहले सप्ताह में दोबारा बैठक होगी। साथ ही पिछली बैठक की कार्यवाही भी जारी की जानी थी। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि सरकार ने न तो बैठक की कार्यवाही जारी की और न ही तय समय पर मुख्यमंत्री स्तर की बातचीत कराई।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के नए पत्र पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बैठक का एजेंडा स्पष्ट नहीं था और यह भी नहीं बताया गया था कि इसमें नीतिगत फैसले लिए जाएंगे या केवल अधिकारियों के स्तर पर चर्चा होगी।
प्रतिनिधित्व को लेकर भी नाराजगी
कर्मचारी नेताओं ने बैठक में प्रतिनिधित्व को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से भेजे गए पत्र में साझा तालमेल कमेटी के एक प्रमुख नेता का नाम शामिल नहीं किया गया, जबकि कमेटी से बाहर के एक व्यक्ति को आमंत्रित किया गया। संगठनों का दावा है कि इस तरह की प्रक्रिया से कर्मचारी संगठनों में विभाजन पैदा हो सकता है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
पुरानी पेंशन योजना (OPS): कर्मचारियों की मांग है कि पुरानी पेंशन योजना को बिना किसी शर्त के पूरी तरह लागू किया जाए।
छठे वेतन आयोग की विसंगतियां: वेतन ढांचे से जुड़ी खामियों को दूर कर कर्मचारियों को राहत दी जाए।
कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: संविदा, आउटसोर्स और दिहाड़ी पर वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
DA का बकाया: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की महंगाई भत्ते की लंबित किस्तों और एरियर का भुगतान किया जाए।
तीन साल का प्रोबेशन नियम खत्म करना: नए भर्ती कर्मचारियों पर लागू प्रोबेशन अवधि और इस दौरान कम वेतन देने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
पदों की कटौती पर रोक: विभागों के पुनर्गठन के नाम पर खाली पद खत्म करने की नीति रोकी जाए और पारदर्शी तरीके से नई भर्तियां निकाली जाएं।
22 अक्टूबर को विधानसभा सत्र के दौरान भी हड़ताल
साझा मुलाजिम फ्रंट के अनुसार, कर्मचारी 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर आंदोलन करेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि 22 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा के सत्र के दौरान भी कर्मचारी दफ्तरी कामकाज नहीं करेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने यह भी कहा है कि यदि हड़ताल या सामूहिक छुट्टी में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई की गई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वहीं, संगठन ने अपने सदस्यों से हड़ताल के दौरान कार्यालयों में उपस्थित न रहने की अपील की है और ऐसा करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अब सरकार और कर्मचारियों के बीच क्या होगा?
सरकार की ओर से बातचीत के लिए बुलाए जाने और कर्मचारी संगठनों के बहिष्कार के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है। कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत कब और किस स्तर पर होगी, यह स्पष्ट नहीं है। यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो सरकारी कार्यालयों और विधानसभा सत्र से जुड़े कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालांकि, हड़ताल के दौरान सरकारी सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा और सरकार आगे क्या कदम उठाएगी, यह आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
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