कहते हैं कि जब खुद का घर कांच का हो तो दूसरों पर पत्थर नहीं फैंका करते। लेकिन यहां तो पंजाब के मंत्री अमन अरोरा ने गृह मंत्री अमित शाह से चार सवाल पूछ लिए हैं। जब्कि ऐसा करके वह खुद ही फंसते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि पंजाब में वर्तमान में बीजेपी नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी की सरकार है। जी हां देश के एक बड़े राज्य पंजाब में इस समय नशे की जड़े लगातार पैर पसारती जा रही है।
पंजाब का युवा नशे के आगोश में आता जा रहा है। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। चिट्टा, गांजा, अफीम, चरस पंजाब में बिकना आम बात हो चुके हैं। आम आदमी की सरकार जब से पंजाब में बनी है तब से युवा नशे का शिकार हो रहे हैं। भगवंत मान की सरकार नशा मुक्त अभियान चलाकर इस मुद्दे से सभी का ध्यान भटका रही है। सरकार ने अपने कार्यकाल में नशा मुक्त पंजाब बनाने की जगह उड़ता पंजाब बना दिया है।
युवाओं के अंदर नशे की लत और भी ज्यादा बड़ गई है। इसके बाद भी सरकार इसे गंभीरता से लेने के बजाय अभियानों को चलाने की बानगी करके पल्ला झाड़ती है। इसी बीच पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री अमन अरोरा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पंजाब यात्रा का स्वागत करते हुए मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा सुरक्षा संबंधित 4 सवालों को उठाया है। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि जब सरकार किसी प्रदेश की आप संभाल रहे हैं। तो नशे को रोकने की जिम्मेदारी आखिर कैसे अमित शाह पर थोड़ी जा सकती है?
अमित शाह का आज पंजाब दौरा
पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री अमन अरोरा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पंजाब यात्रा का स्वागत करते हुए मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर 4 खास सवाल किए है। दरअसल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज पंजाब दौरे पर हैं। वह नशे की लत के प्रभावित परिवारों से आज मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही अमित शाह नशे से जुड़े मुद्दे पर भी लोगों को संबोधित करेंगे।
अमन अरोड़ा ने शाह से पूछे 4 सवाल?
बीजेपी की तरफ से शाह पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए कई विचारों को भी साझा करने वाले हैं। ऐसे में जब अमित शाह पंजाब दौरे पर हैं। तो पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोरा ने शाह के आगमन का सवागत करते हुए उनके सामने 4 सवाल रखे हैं। इसमें उन्होंने शाह के सामने पहला सवाल यह उठाया है कि पंजाब और पाकिस्तान के बीच 543 किलो लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करने में क्यों विफल रहा?
दूसरा सवाल अमन अरोरा ने यह करा कि, 3000 किलो हेरोइन गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह तक कैसे पहुंची और देश के कई जिलों में इसकी सप्लाई कैसे हुई? तीसरा सवाल उन्होंने यह पूछा, पंजाब में साल 2007 से 2017 में चिट्टा शब्द पहली बार सुना। जिस समय भाजपा अकाली दल के साथ सरकार चला रही थी, उस दौरान भाजपा क्यों चुप थी? चौथे सवाल में उन्होंने पूछा कि, गैंगस्टर और ड्रग्स कानून व्यवस्था के दायरे में आते हैं, तो भाजपा शासित राज्यों में क्या स्थिति है?
पंजाब में नशे ने किए कई परिवार खत्म
यहां अमन अरोरा ने तो सवाल कर लिए हैं। लेकिन गौर किया जाए तो आम आदमी पार्टी की सरकार में पंजाब में नशा हवा नहीं बल्कि आंधी की तरह आया है। जिसने ना जाने कितने परिवारों के घर के चिराग बुझा दिए। तो कई परिवारों को आर्थिक तौर पर कमजोर कर दिया है। भगवंत मान की सरकार पंजाब में कानून व्यवस्था की बात की जाए तो अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।
नशे का जड़ों को काटने की बात करने वाली पंजाब सरकार को पहले अपराध की जड़ों को काटना होगा। क्योंकि किसी प्रदेश की जनता तभी सुखी रह सकती है, जब वहां के लोग खौफ के साए में जीना छोड़ देंगे। लेकिन पंजाब में इसके विपरीत ही परिस्थितियां चल रही है। खुलेआम फायरिंग, अहरण, नशा तस्करी, गैंगस्टरवाद और फिरौती जैसे मामलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।
20 दिनों में शाह का दूसरा दौरा
शाह ने 30 सिंतबर को पंजाब के जालंधर में नशा मुक्त पंजाब यात्रा के समापन समारोह को संबोधित किया था। 20 दिन में शाह का यह दूसरा पंजाब दौरा है। वह बटाला के माड़ी पन्नवा जाएंगे और विक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात करेंगे। जहां से वह संगरूर के तूरबंजारा जाएंगे और गुलजार सिंह के परिजनों से मिलेंगे। यहां से वह मानसा निकलेंगे और परविंदर झोटा के परिवार से मुलाकात करेंगे। शाम को वह लुधियाना में दशहरा समारोह में शामिल होंगे।
बड़ी पीढ़ी नशे की चपेट में आई
पंजाब में नशा आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवाओं की एक बड़ी पीढ़ी इसकी चपेट में आ रही है। ड्रग ओवरडोज से होने वाली मौतों और नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज के लिए आने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पंजाब में बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत है। जो राष्ट्रीय औसत 5.4 प्रतिशत से काफी से ज्यादा है। यह पंजाब में नशे की मुख्य जड़ है।
युद्ध नशेया विरुद्ध आप सरकार ने चलाया
राज्य सरकार द्वारा 'युद्ध नशेया विरुद्ध' जैसे विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, एनडीपीएस (NDPS) कानून के तहत हजारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, फिर भी जमीनी स्तर पर नशे के कारोबार और आपूर्ति को रोकने में बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
आखिर पंजाब के युवाओं में क्यों बढ़ी नशे की लत
युवाओं में नशे की लत बढ़ने के मुख्य कारण मानसिक दबाव, सामाजिक प्रभाव और आसानी से उपलब्ध होने वाला नशे का सामान है। इसके मुख्य कारणों पर करते हैं गौर?
तनाव और मानसिक दबाव: करियर का प्रेशर, पढ़ाई, बेरोजगारी और अवसाद से अस्थाई तौर पर राहत पाने के लिए युवा नशे का सहारा लेते हैं।
साथियों का दबाव: कई बार युवाओं को ऐसे दोस्त मिल जाते हैं। जिनकी संगति में वह खुद को कूल दिखाने के लिए धूम्रपान, शराब पीने व ड्रग्स लेने के आदि हो जाते हैं।
पारिवारिक वातावरण: परिवार में संवादहीनता, मता-पिता की अनदेखी, या घर में पहले से नशे की लत का माहौल होने के कारण भी परिवार का बच्चा शराब आदि का सेवन करने लगता है।
आसान उपलब्धता और सोशल मीडिया: नशीले पदार्थों का आसानी से मिलना और इंटरनेट पर ग्लैमराइज्ड सामान युवाओं को नशे के लिए आकर्षित करता है।
मस्तिष्क का विकास: पंजाब में ज्यादातर लोग किशोरावस्था में ही नशे का शिकार हो रहे हैं। दिमाग का वह हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं होता है, इसके परिणामस्वरूप वह खुद को नशा मुक्त करने के बारे में सोच नहीं पाते।
यह भी पढ़ें: कीव में रूसी हवाई हमले में 3 लोगों की मौत, 6 घायल! ट्रंप का पुतिन को मिलेगा साथ, क्या लगेगा युद्ध विराम?