उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखनाथ मंदिर में नौ कन्याओं का पूजन किया। उनके पैर पखारे, तिलक लगाया और भोजन कराया। यह धार्मिक परंपरा नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है, लेकिन सवाल है कि क्या पूजा में कन्याओं को देवी मानने वाला समाज असल जिंदगी में भी महिलाओं को बराबरी, सुरक्षा और सम्मान दे पा रहा है?
योगी सरकार महिला सुरक्षा और मिशन शक्ति जैसे अभियानों को लेकर अक्सर अपनी पहल गिनाती रहती है। मगर महिला सशक्तिकरण की असली परीक्षा धार्मिक आयोजनों और सरकारी दावों से नहीं बल्कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे आत्याचारों के रोकथाम से है। महिलाओं के खिलाफ अपराध, उत्पीड़न और न्याय मिलने में आने वाली चुनौतियां इस बहस को और अहम बनाती हैं।
कन्या पूजन के बीच रेप की घटनाएं, सरकार से सवाल
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठाने वाली हालिया घटनाओं में ग्रेटर नोएडा का मामला भी शामिल है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, 4 अगस्त को बस में सफर कर रही 16 वर्षीय लड़की के साथ ड्राइवर और कंडक्टर द्वारा कथित गैंगरेप की घटना सामने आई। आयोग ने 1 सितंबर को दिल्ली और गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्तों तथा मैनपुरी के एसपी से रिपोर्ट मांगी।
वहीं, सितंबर में अमरोहा के हसनपुर इलाके में एक महिला से कथित गैंगरेप के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के दो और सीआरपीएफ के दो जवानों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, मामले में विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई।
ये मामले आरोपों और जांच के संदर्भ में देखे जाने चाहिए, लेकिन ये जरूर बताते हैं कि महिला सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। सवाल है कि सुरक्षा के दावों के बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
नेहा सिंह राठौर प्रकरण ने भी उठाए सम्मान के सवाल
महिलाओं की गरिमा का मुद्दा केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। हाल ही में लोकगायिका नेहा सिंह राठौर से जुड़ी एक गलत रिपोर्ट प्रसारित करने के बाद एक मीडिया चैनल ने सार्वजनिक माफी मांगी। रिपोर्ट में उनके नाम को कथित सेक्स रैकेट से जोड़ने पर नेहा ने आपत्ति जताई और कानूनी कार्रवाई की बात कही।
यह महिला अपराध का मामला नहीं, बल्कि किसी महिला की प्रतिष्ठा और मीडिया की जवाबदेही से जुड़ा विवाद है। यह सवाल भी अहम है कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने वाली महिलाओं की गरिमा की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए
महिला सशक्तिकरण के दावों की असली परीक्षा
सरकार के लिए चुनौती केवल अभियान चलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं सुरक्षित सफर कर सकें, उनकी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई हो और उन्हें न्याय पाने के लिए संघर्ष न करना पड़े। पुलिस की जवाबदेही, निष्पक्ष जांच और पीड़िताओं को सहायता मिलना महिला सुरक्षा के जरूरी पैमाने हैं
कन्या पूजन आस्था का विषय है, लेकिन महिला सशक्तिकरण की कसौटी रोजमर्रा की जिंदगी है। योगी सरकार से सवाल है कि धार्मिक परंपराओं में नारी शक्ति के सम्मान का संदेश जमीन पर महिलाओं की सुरक्षा और बराबरी में बदलने के लिए क्या नतीजे सामने आ रहे हैं?
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