नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में दो मतदाताओं की याचिका पर कार्यवाही समाप्त कर दी। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने उस प्रक्रिया को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें अपनी पुरानी प्रविष्टियों को बहाल या स्थानांतरित कराने के बजाय, मतदाता सूची में नए सिरे से नाम जुड़वाने के लिए कहा गया था।

गलत घोषणा के आरोप की आशंका उचित नहीं: Delhi HC

इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति अदिति चौधरी की पीठ ने निलोत्पल दत्ता और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका पर कार्यवाही को बंद करते हुए कहा कि, चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारी के निर्देश पर यह विकल्प सुझाया गया है, इसलिए गलत घोषणा के आरोप की आशंका को लेकर याचिकाकर्ता की चिंता उचित नहीं है।

'फॉर्म 6' भरने को लेकर 'गलत घोषणा' की आशंका

अदालत ने कहा कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद, दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' भरने को लेकर 'गलत घोषणा' करने का आरोप लग सकता है, यह सोंच बेबुनियाद है। याचिकाकर्ता चाहें तो Form 6 भर सकते हैं और आवेदन पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं चुनाव आयोग (ECI) के वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता Form 6 जमा करके अपनी शिकायत का समाधान मांग सकते हैं।

Form 6 को लेकर क्यों दर्ज की गई याचिका?

इस मामले मे याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उनके नाम दोबारा शामिल करने के लिए नए पंजीकरण वाले Form 6 के बजाय मतदाता विवरण में सुधार या स्थानांतरण के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 8 भरने की अनुमति दी जाए। उनका तर्क था कि Form 6 भरने पर पहली बार पंजीकरण कराने की घोषणा के कारण गलत जानकारी देने का आरोप लग सकता है।

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