तेलंगाना सरकार जल्द ही नई एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी 2.0 पेश करने जा रही है। इसका मकसद रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, नई तकनीकों को बढ़ावा देना और हैदराबाद को रक्षा अनुसंधान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने यह जानकारी ‘रक्षा एक्सपो’ के शुरुआती कार्यक्रम में दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा एक्सपो के जरिए रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, विशेषज्ञों, सरकारी संस्थानों और निवेशकों को एक मंच पर लाया जाएगा। इससे आपसी सहयोग बढ़ेगा और नई तकनीकों के विकास को गति मिलेगी।

रक्षा क्षेत्र में हैदराबाद की अहम भूमिका

रेवंत रेड्डी ने कहा कि हैदराबाद में कई प्रमुख शोध संस्थान और भारतीय सेना व वायुसेना से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्र मौजूद हैं। समुद्र तट नहीं होने के बावजूद तेलंगाना भारतीय नौसेना को जरूरी सेवाएं दे रहा है, उन्होंने बताया कि विकाराबाद जिले के दमागुंडम रिजर्व फॉरेस्ट में बहुत कम आवृत्ति वाला (VLF) नौसैनिक रडार स्टेशन बनाया जा रहा है, उन्होंने कहा कि तेलंगाना में रक्षा उत्पादन और अनुसंधान को आगे बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। सरकार चाहती है कि राज्य देश के सबसे बड़े रक्षा औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो।

निवेशकों से की निवेश बढ़ाने की अपील

मुख्यमंत्री ने निवेशकों को 7 से 9 दिसंबर तक हैदराबाद के भारत फ्यूचर सिटी में होने वाले ‘इन्वेस्ट तेलंगाना ग्लोबल समिट’ में शामिल होने का न्योता दिया, उन्होंने कहा कि पिछले साल आयोजित इस सम्मेलन को अच्छी सफलता मिली थी। रेवंत रेड्डी ने निवेशकों से तेलंगाना में अपने प्रस्तावित निवेश को दोगुना करने की अपील की, उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उद्योगों को स्थापित करने और कारोबार बढ़ाने के लिए पूरा सहयोग देगी।

DRDO, HAL और एयरबस समेत कई कंपनियां हुईं शामिल

रक्षा एक्सपो के शुरुआती कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), मिधानी, टाटा समूह, एयरबस, स्काईरूट, लॉकहीड मार्टिन और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों व संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कुशल युवाओं की जरूरत है। इस दिशा में IIT, IIIT, NIT, ISB और BITS जैसे संस्थान अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी की स्थापना, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को एडवांस्ड ट्रेनिंग सेंटर में बदलने और राज्य में मौजूद स्टार्टअप इनक्यूबेटर का भी जिक्र किया।

रक्षा तकनीक के आयात से निर्यात की ओर बढ़े भारत

रेवंत रेड्डी ने कहा कि भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में जगह बनानी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि देश केवल विदेशी तकनीक पर निर्भर न रहे, बल्कि खुद आधुनिक तकनीक विकसित करके दूसरे देशों को भी निर्यात करे, उन्होंने रक्षा उद्योग के साथ-साथ अंतरिक्ष, एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा देने की जरूरत बताई, उनका कहना था कि इन सभी क्षेत्रों में तेलंगाना देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन सकता है।

2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने ‘तेलंगाना राइजिंग: विजन 2047’ का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का लक्ष्य 2034 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, उन्होंने बताया कि तेलंगाना देश की कुल आबादी में 2.5 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखता है और भारत की GDP में करीब 5 प्रतिशत योगदान देता है। राज्य सरकार का लक्ष्य 2047 तक देश की GDP में तेलंगाना की हिस्सेदारी बढ़ाकर 10 प्रतिशत करना है।

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निवेश और विकास पर सभी की सहमति: मुख्यमंत्री

रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन निवेश और विकास के मुद्दे पर सभी की सोच एक जैसी है, उन्होंने स्पष्ट किया कि तेलंगाना में नीतियों को लेकर कोई ठहराव नहीं है और सरकार विकास के लिए लगातार काम कर रही है, उन्होंने कहा कि राज्य के पास प्रतिभाशाली युवा, कुशल मानव संसाधन और जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। स्पष्ट नीतियों और विकास के प्रति मजबूत इच्छाशक्ति के साथ तेलंगाना रक्षा क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत, रक्षा एवं सुरक्षा अधिकारियों, विशेषज्ञों और स्टार्टअप से रक्षा एक्सपो में शामिल होकर नए विचार और आधुनिक तकनीक पेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।