Aligarh Industrial City: अलीगढ़ में औद्योगिक विकास की नई तस्वीर तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। बता दें कि अलीगढ़-पलवल हाईवे के पास प्रस्तावित राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी में किसानों की जमीन पर औद्योगिक शहर बसाया जाएगा, लेकिन इसकी खास बात यह है कि जमीन के बदले किसानों को विकसित भूखंड देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (ADA) ने भूमि अधिग्रहण के बजाय लैंड पुलिंग के जरिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे किसानों को भविष्य में विकसित क्षेत्र में हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है।

1,358 हेक्टेयर जमीन पर विकसित होगा औद्योगिक शहर
राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी के लिए कुल 1,358 हेक्टेयर यानी करीब 3,355 एकड़ जमीन जुटाने की योजना है। इसके दायरे में सोफा, राजपुर और नारायणपुर गांव शामिल हैं। एडीए के अनुसार, इन गांवों के 3,663 परिवारों से संपर्क किया जा चुका है। अब तक 169 सहमतियां मिली हैं, जिनके आधार पर 264 हेक्टेयर जमीन के लिए करार प्रस्तावित है। जमीन जुटाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके बाद औद्योगिक इकाइयों के लिए क्षेत्र तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

एक एकड़ जमीन देने पर कितना हिस्सा मिलेगा?
राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी की प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को स्थान और लागू शर्तों के आधार पर 25 फीसदी तक विकसित जमीन वापस मिल सकती है। यानी किसान को जमीन देने के बदले विकसित भूखंड मिलने का अवसर होगा। हालांकि, वास्तविक भूखंड का आकार, स्थान और पात्रता परियोजना की आधिकारिक नीति व करार की शर्तों पर निर्भर करेगी। इसलिए किसानों के लिए जमीन देने से पहले संबंधित दस्तावेजों और नियमों को समझना जरूरी है।

किसानों को नौ महीने में प्लॉट देने का लक्ष्य
परियोजना से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, जमीन का करार पूरा होने के बाद किसानों को नौ महीने में विकसित भूखंड आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, यह समय-सीमा किस तारीख या चरण से शुरू होगी, इसकी स्पष्ट पुष्टि जरूरी है।

जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एडीए एक कंसल्टेंसी कंपनी की मदद ले रहा है। कंपनी की करीब नौ सदस्यीय टीम किसानों से संपर्क करने, जमीन के दस्तावेजों की जानकारी जुटाने और सहमति से जुड़े काम में लगी है। इसमें दो लेखपाल और सात सहायक कर्मचारी शामिल बताए गए हैं।

सेमीकंडक्टर से फार्मा तक, इन उद्योगों पर नजर
राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी में सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयां विकसित करने की योजना है। दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और पलवल के नजदीक होने के कारण इस इलाके को औद्योगिक निवेश के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

यदि परियोजना योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो यहां उद्योगों के लिए जमीन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना भी है। हालांकि, कितनी इकाइयां स्थापित होंगी और कितने रोजगार पैदा होंगे, इसका आकलन परियोजना के अगले चरणों में ही किया जा सकेगा।

क्या है लैंड पुलिंग और किसानों को कैसे होगा फायदा?
लैंड पुलिंग ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसान अपनी जमीन किसी नियोजित विकास परियोजना के लिए देते हैं। इसके बाद विकास प्राधिकरण उस क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, सीवर और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करता है। योजना की शर्तों के मुताबिक, किसान को उसकी दी गई जमीन के बदले एक हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में वापस मिल सकता है। इस व्यवस्था में किसान को केवल जमीन के बदले मुआवजा लेने के बजाय विकसित क्षेत्र में भूखंड का मालिक बनने का अवसर मिलता है। लेकिन इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि करार की शर्तें क्या हैं, भूखंड कहां मिलता है और क्षेत्र का विकास किस गति से होता है।

एडीए का क्या कहना है?
एडीए के उपाध्यक्ष कुलदीप मीणा के मुताबिक, राजपुर इंडस्ट्रियल सिटी के लिए लैंड पुलिंग के जरिए जमीन जुटाई जा रही है। प्रक्रिया जल्द पूरी करने के बाद परियोजना में बुनियादी सुविधाओं के विकास का काम आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने इसे जिले के लिए महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र बताया।

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल परियोजना का अहम चरण किसानों की सहमति और जमीन के करार पूरे करना है। इसके बाद बुनियादी सुविधाओं का विकास और औद्योगिक क्षेत्र तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि उन्हें मिलने वाले भूखंड का आकार, स्थान, आवंटन की समय-सीमा और अन्य शर्तें आधिकारिक दस्तावेजों में स्पष्ट हों। 

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