बच्चों का बड़े होते हुए किसी की तरफ आकर्षित होना सामान्य बात है। किशोरावस्था में किसी की दोस्ती अच्छी लगना या उसके साथ ज्यादा समय बिताने का मन करना स्वाभाविक है। हालांकि, ऐसी स्थिति में कई माता-पिता परेशान होकर बच्चों को डांटने या उन पर पाबंदियां लगाने लगते हैं। इससे बच्चा अपनी भावनाएं साझा करने के बजाय बातें छिपाने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता धैर्य रखें और बच्चे को सही दिशा दिखाएं।
सबसे पहले बच्चे की बात ध्यान से सुनें
अगर आपको पता चलता है कि आपका बच्चा किसी को पसंद करता है, तो तुरंत गुस्सा न करें। उससे शांति से बात करें और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। उसकी बात बीच में काटने, मजाक उड़ाने या उसे गलत ठहराने से बचें। इससे बच्चे का भरोसा बढ़ेगा और वह आपसे खुलकर बात कर सकेगा।
प्यार से समझाएं, शर्मिंदा न करें
बच्चे को छोटी उम्र में प्यार के बारे में सोचने के लिए शर्मिंदा न करें। उसे समझाएं कि किसी के प्रति आकर्षण महसूस करना सामान्य है, लेकिन हर भावना के आधार पर तुरंत फैसला लेना जरूरी नहीं है। इस उम्र में पढ़ाई, नई स्किल्स सीखने और अच्छी दोस्ती बनाए रखने पर भी ध्यान देना चाहिए।
रिश्तों में सीमाओं का महत्व बताएं
बच्चों को दोस्ती और रिश्तों में सम्मान, भरोसे और सहमति की अहमियत समझाएं। उन्हें बताएं कि किसी के दबाव में आकर निजी तस्वीरें साझा करना या व्यक्तिगत जानकारी देना ठीक नहीं है। यदि कोई उन्हें डराता या ब्लैकमेल करता है, तो बिना झिझक माता-पिता को बताने के लिए प्रोत्साहित करें।
पढ़ाई और दिनचर्या में संतुलन बनाएं
अगर बच्चा किसी के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगा है और उसकी पढ़ाई या नींद प्रभावित हो रही है, तो उसे डांटने के बजाय दिनचर्या बनाने में मदद करें। पढ़ाई के साथ खेलकूद, दोस्तों और पसंदीदा गतिविधियों के लिए भी समय तय करें। मोबाइल इस्तेमाल के नियम मिलकर बनाएं।
बच्चे के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए रखें
बिना वजह फोन चेक करना या बार-बार पूछताछ करना बच्चे को आपसे दूर कर सकता है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर खुलकर बात करें। यदि बच्चा लगातार परेशान रहता है या उसके व्यवहार में बड़ा बदलाव आता है, तो काउंसलर की मदद लें।
किशोरावस्था में किसी को पसंद करना अपने आप में गलत नहीं है। माता-पिता का काम बच्चे की भावनाओं को दबाना नहीं, बल्कि उसे समझदारी, सम्मान और जिम्मेदारी के साथ रिश्ते निभाना सिखाना है। प्यार और भरोसे से की गई बातचीत बच्चे को सही दिशा दिखा सकती है।
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