नई दिल्ली: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अधिवक्ता विनीत जिंदल ने 21 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत देकर राउत के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अल्बानिया की सुप्रीम कोर्ट में आगजनी की घटना का जिक्र करते हुए भारत को उससे सबक लेने की बात कहने वाली पोस्ट की जांच होनी चाहिए। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की पुलिस जांच और किसी आपराधिक कृत्य की पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है संजय राउत की पोस्ट में?
शिकायत के मुताबिक, संजय राउत के X अकाउंट पर साझा की गई पोस्ट में आग और तबाही का एक वीडियो शामिल है। इसके साथ मराठी में लिखे संदेश का अंग्रेजी अनुवाद भी दिया गया है। इसमें कथित तौर पर अल्बानिया में भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद करने के आरोपों को लेकर लोगों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में आग लगाने की घटना का जिक्र है।

शिकायत में कहा गया है कि पोस्ट में संसद, सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के आवासों पर हमलों का भी उल्लेख किया गया है। पोस्ट के अंत में सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेने की बात कही गई है। इसके बाद ‘Especially’ शब्द और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इमोजी दिखाई देने का दावा किया गया है।

किन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग?
विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(1)(b), 152, 196 और 197 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि पोस्ट, वीडियो और भारत का उल्लेख एक साथ देखकर यह जांचा जाना चाहिए कि क्या सामग्री संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के रूप में समझी जा सकती है। उन्होंने पुलिस से यह भी अनुरोध किया है कि पोस्ट का मूल लिंक, वीडियो, मराठी टेक्स्ट, अंग्रेजी अनुवाद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि उनकी जांच की जा सके।

पोस्ट पर लाखों व्यूज का दावा
शिकायत के साथ दिए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, पोस्ट को कैप्चर किए जाने के समय करीब 13 लाख व्यूज, 12 हजार लाइक्स, 4,400 रीपोस्ट और 6,300 जवाब मिले थे। ये आंकड़े शिकायत में दर्ज विवरण पर आधारित हैं और बाद में बदल सकते हैं।

CJI और न्यायपालिका पर टिप्पणी का भी जिक्र
शिकायत में संजय राउत से जुड़े एक अलग मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायपालिका के संबंध में कथित टिप्पणियों को लेकर राउत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, शिकायतकर्ता ने यह भी माना है कि पहले की न्यायिक कार्यवाही और मौजूदा सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े आरोप अलग-अलग मामले हैं।

अब आगे क्या होगा?
अधिवक्ता ने दिल्ली पुलिस से पोस्ट की जांच कर यह निर्धारित करने की मांग की है कि क्या इसमें संज्ञेय अपराध के तत्व मौजूद हैं और FIR दर्ज करने का आधार बनता है। फिलहाल यह शिकायत पुलिस से कार्रवाई की मांग है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि पोस्ट ने कोई अपराध किया है या FIR दर्ज हो चुकी है। 

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