नई दिल्ली: अल्बानिया की राजधानी तिराना में सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री एडी रामा की सरकार को निशाना बनाकर उनके कार्यालयों के बाहर सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन से हो रहै हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रधानमंत्री का इस्तीफा, भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाबदेही, रोजगार के अवसरों में सुधार और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान शामिल है।इस विरोध प्रदर्शन में 270 से ज़्यादा लोग घायल हो गए हैं।
अल्बानिया की घटना से भारत में राजनीतिक विवाद शुरू
अल्बानिया में लगी आग ने पूरी दुनिया में तब सनसनी फैला दी जब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने X पर हमले की खबर शेयर करते हुए भारत को इस अशांति से "सबक" लेने का सुझाव दिया। इस तरह अल्बानिया की इस घटनाओं ने भारत में भी राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
इन घटनाओं से भारत को भी लेना चाहिए सबक: संजय
शिवसेना (UBT) के नेता सांसद संजय राउत ने अल्बानिया में चल रहे हिंसक प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए भारत को इन घटनाओं से सबक लेने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि वहां प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के समर्थन को लेकर न्यायपालिका से नाराज थे और इसी गुस्से में सुप्रीम कोर्ट, संसद तथा सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया गया। राउत ने कहा कि दुनिया के सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को। वहीं राउत की बातों की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी निंदा की
संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर राजनीतिक बहस तेज
संजय राउत की इस टिप्पणी के बाद देश में न्यायपालिका, लोकतांत्रिक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा है।
BJP नेता प्रदीप भंडारी ने पलटवार करते हुए विपक्षी गठबंधन पर खुलेआम सरकार द्वारा मंजूर हिंसा और संस्थाओं के पतन की इच्छा रखने का आरोप लगाया है। भंडारी ने कहा, "कांग्रेस पार्टी और उसका गठबंधन अराजकता और सुप्रीम कोर्ट को धमकी दे रहा है! वे अराजकता की कल्पना कर रहे हैं! इससे साबित होता है कि वे अराजकता चाहते हैं! कांग्रेस पार्टी और उनका गठबंधन भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा हैं!"
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