अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर NSUI ने शनिवार 17 अक्टूबर को दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अगुवाई में निकला यह मार्च संगठन के राष्ट्रीय कार्यालय से शुरू हुआ। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए, जबकि सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस प्रदर्शन के जरिए NSUI ने अंकिता भंडारी के मामले में न्याय सुनिश्चित करने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। संगठन ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष व पारदर्शी होनी चाहिए।
‘नारी वंदन’ की बात करने वाली BJP अपने फैसलों पर भी जवाब दे: NSUI
कैंडल मार्च के दौरान NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने बीजेपी के महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के दावों पर सवाल खड़े किए, उन्होंने कहा कि एक तरफ बीजेपी ‘नारी वंदन’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त करने का फैसला लेती है, जिसके खिलाफ जांच जारी होने का दावा किया जा रहा है। जाखड़ ने कहा, “भाजपा जिस तरह ‘नारी वंदन’ की बात करती है, उसे देश की बेटियां देख रही हैं और पूरा देश यह देख रहा है कि आप ऐसे व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त कर रहे हैं, जिसके खिलाफ जांच अभी भी जारी है”, उनके इस बयान के जरिए NSUI ने बीजेपी को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की। संगठन का सवाल है कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करने वाली पार्टी के फैसलों को भी इन्हीं दावों की कसौटी पर क्यों न परखा जाए?
अंकिता भंडारी के मामले में न्याय की मांग
NSUI कार्यकर्ताओं ने मार्च के दौरान अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग दोहराई। संगठन ने कहा कि यह मामला केवल एक पीड़िता को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है। NSUI ने साफ किया कि अंकिता भंडारी के मामले में न्याय और जवाबदेही की मांग आगे भी उठाई जाती रहेगी। संगठन के मुताबिक, महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े-बड़े दावे करने के बजाय जरूरी है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई हो और न्याय की मांग को गंभीरता से सुना जाए। दिल्ली में निकाला गया यह कैंडल मार्च बीजेपी के महिला सशक्तीकरण के दावों पर सवाल उठाने और अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग को फिर से सामने लाने का प्रयास रहा।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल क्या है?
बात दें कि अंकिता की हत्या के मामले में तीन लोगों को सजा मिल चुकी है। अब विवाद इस बात पर है कि क्या कथित VIP की भूमिका और जांच से जुड़े बाकी सवालों का भी संतोषजनक जवाब मिला है। यही वजह है कि NSUI और कांग्रेस समेत कई संगठन बीजेपी से सवाल कर रहे हैं। दूसरी तरफ, बीजेपी ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताने पर आपत्ति जताई है और मामले की स्वतंत्र जांच की बात कही है।
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क्या है अंकिता भंडारी मामला
अंकिता भंडारी मामला उत्तराखंड का एक चर्चित हत्याकांड है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक रसूख और न्याय व्यवस्था को लेकर देशभर में सवाल खड़े किए। सितंबर 2022 में 19 साल की अंकिता की हत्या कर दी गई थी। मामले में तीन लोगों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन अब कथित ‘VIP’ की भूमिका को लेकर सवाल फिर उठ रहे हैं।