फ्रांस में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया है। देश के कई शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। इनमें बड़ी संख्या में छात्र और आम नागरिक शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों, महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई। शनिवार को हुए प्रदर्शनों में लाखों लोगों के शामिल होने की खबरें सामने आईं। बता दें कि दिन में ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम होते-होते कई शहरों में हालात बिगड़ गए। कुछ जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया।

फ्रांस में आखिर हो क्या रहा है?

फ्रांस में शुरू हुआ विरोध अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार से जवाब मांग रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य शिकायत है कि देश में महंगाई बढ़ रही है, स्कूलों की हालत खराब हो रही है और सरकार उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। युवाओं का यह भी आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही।

प्रदर्शन के दौरान हिंसा क्यों भड़कीं?

शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे थे, लेकिन शाम के बाद कई शहरों में हिंसा की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, लीमोज शहर में ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई, जिससे उसकी छत गिर गई। मार्सिले में कुछ प्रदर्शनकारी सिटी हॉल में घुस गए और वहां तोड़फोड़ की। वहीं, ल्यों में एक पर्यटन कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया।

पेरिस में भी प्रदर्शन खत्म होने के बाद कुछ युवाओं के समूहों पर दुकानों में लूटपाट और आगजनी करने के आरोप लगे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया।

सरकार ने क्या कार्रवाई की?

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने हिंसा को अस्वीकार्य बताया। उनके मुताबिक, देशभर में करीब 1,200 लोगों को हिरासत में लिया गया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन हिंसा, आगजनी और सरकारी इमारतों पर हमले करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वह हिंसा करने वालों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले लोगों के खिलाफ सख्ती जारी रखेगी।

छात्रों में इतना गुस्सा क्यों?

इस आंदोलन की एक बड़ी वजह फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ता असंतोष है। छात्रों का कहना है कि स्कूलों में सुविधाएं कम हो रही हैं और शिक्षकों की कमी बढ़ रही है। उनकी मांग है कि कक्षाओं में छात्रों की संख्या घटाई जाए, शिक्षकों की भर्ती और उन पर खर्च बढ़ाया जाए और स्कूलों की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए। इसके अलावा, छात्र चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी ज्यादा निवेश किया जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही। शिक्षा मंत्री एदुआर ज्याफ्रे ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है।

क्यों बढ़ रहा है पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा?

इस आंदोलन में पुलिस की कार्रवाई भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस कई बार जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में पुलिस की कार्रवाई में एक 14 साल का लड़का घायल हो गया था, जिसका जबड़ा टूट गया है। इसके अलावा, अलांसों शहर में एक पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल हो रहा है जहां वो एक लड़की को गर्दन से पकड़कर ले जा रहा है। इस घटना ने पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए। सेंट-एटियेन में एक प्रदर्शनकारी का हाथ कटने की खबर भी सामने आई। इससे पहले लेंस शहर में एक छात्र का हाथ ग्रेनेड उठाने के बाद कट गया था। इन घटनाओं के बाद पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ हथियारों पर सवाल उठे। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि पुलिस की कार्रवाई की जांच हो और युवाओं के खिलाफ पुलिस हिंसा पर रोक लगाई जाए।

विपक्ष और दूसरे देशों की क्या है प्रतिक्रिया?

फ्रांस की वामपंथी पार्टी ला फ्रांस इंसोमीज के नेता जां-लुक मेलांशों ने कहा कि ज्यादातर लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, उनका आरोप है कि मीडिया में हिंसा की घटनाओं को ज्यादा दिखाया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में लोग बिना किसी हिंसा के प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का एक और बड़ा आरोप है कि देश में आर्थिक ताकत और राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार कुछ लोगों के हाथों में सिमट गया है। फ्रांस के बाहर भी इस आंदोलन को समर्थन मिलने की खबरें आई हैं। बेल्जियम, अल्बानिया और इटली में कुछ युवा कार्यकर्ताओं ने छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किए।

क्या मैक्रों सरकार के लिए बढ़ सकती है मुश्किल?

इन प्रदर्शनों ने फ्रांस सरकार के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक तरफ सरकार को आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट जैसी घटनाओं पर रोक लगानी है, तो दूसरी तरफ छात्रों और आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान भी करना है। अगर शिक्षा, महंगाई और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो सरकार के खिलाफ असंतोष और बढ़ सकता है।

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