कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की गिरफ्तारी के बाद चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के विरोध में विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे हैं। अब इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रमुख वाई एस जगनमोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) के रुख ने भी सबका ध्यान खींचा है।
जगन मोहन रेड्डी की पार्टी संसद में कई मुद्दों पर एनडीए सरकार का समर्थन करती रही है। इसके बावजूद उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मौजूदा व्यवस्था पर दुख जताया है, उनके इस बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर एनडीए का साथ देने वाली वाईएसआरसीपी अब इस मुद्दे पर विपक्ष के करीब क्यों दिखाई दे रही है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर क्यों उठाए सवाल?
जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, उनके मुताबिक, इस समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री की ओर से चुना गया एक मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं, उन्होंने इस प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल करने और कानून में बदलाव करने की मांग की है।
उनके बयान का मतलब साफ है कि चुनाव आयोग जैसे अहम संस्थान में नियुक्तियों की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर सभी राजनीतिक दल भरोसा कर सकें, उनका मानना है कि नियुक्ति की व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका और निष्पक्षता को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत होना जरूरी है।
आखिर क्यों विपक्ष का साथ दे रहे हैं जगन मोहन रेड्डी?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आंध्र प्रदेश की राजनीति और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताएं मानी जा रही हैं।
पहली वजह: आंध्र प्रदेश में टीडीपी से राजनीतिक टकराव। बता दें कि जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी फिलहाल आंध्र प्रदेश में विपक्ष की भूमिका में है। राज्य में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की सरकार है। ऐसे में चुनाव से जुड़े फैसलों और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाना वाईएसआरसीपी के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम है।
दूसरी वजह: वोट काटे जाने का मुद्दा है। वाईएसआरसीपी का कहना है कि जिन लोगों के वोट गलत तरीके से काटे जाने की शिकायतें हैं, उनके हितों की रक्षा होनी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि अगर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो इस मुद्दे पर आवाज उठाना जरूरी है। हालांकि, वोट काटने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना भी जरूरी है।
तीसरी वजह: चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भरोसा होना । जगन मोहन रेड्डी की मांग है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव किया जाए। इस मांग के जरिए वह यह संदेश देना चाहते हैं कि चुनाव आयोग की व्यवस्था को लेकर उठने वाली चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
चौथी वजह: एनडीए को समर्थन देने का मतलब हर मुद्दे पर सहमति नहीं होना है। वाईएसआरसीपी का कहना है कि वह मुद्दों के आधार पर एनडीए सरकार का समर्थन करती है, यानी संसद में किसी विधेयक या मुद्दे पर सरकार का साथ देने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी सरकार के हर फैसले से सहमत हो। चुनाव आयोग से जुड़े मामले में उसका अलग रुख इसी राजनीति का हिस्सा हो सकता है।
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क्या लेफ्ट पार्टियों के साथ बढ़ रही है नजदीकी?
जगन मोहन रेड्डी के इस रुख को लेकर यह चर्चा भी हो रही है कि क्या उनकी पार्टी का वामपंथी दलों के साथ तालमेल बढ़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि उनके बयान के पीछे लेफ्ट पार्टियों के साथ किसी खास राजनीतिक समझौते की भूमिका है। जब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, इसे केवल एक संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
क्या NDA से दूर हो रही है YSRCP?
फिलहाल इस बयान को एनडीए का कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने साफ किया है कि वह मुद्दों के आधार पर समर्थन देती है। ऐसे में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर असहमति जताने का मतलब यह नहीं है कि उसने एनडीए के खिलाफ जाने का फैसला कर लिया है।