पुणे के येरवडा में सड़क पर खुदाई के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जल निकासी लाइन बिछाने के लिए खोदे गए 8 से 10 फुट गहरे गड्ढे में गिरने से 69 वर्षीय प्रदीप परदेशी की मौत हो गई। घटना के बाद सवाल उठ रहा है कि जब सड़क पर पिछले 15 दिनों से काम चल रहा था, तो राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी?
यह हादसा 17 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:30 बजे चित्रा चौक सब्जी मंडी के पास हुआ। पुलिस के मुताबिक, प्रदीप परदेशी पैदल जा रहे थे। इसी दौरान पास से गुजर रहे एक ऑटो रिक्शा की टक्कर से उनका संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे खोदे गए गहरे गड्ढे में जा गिरे। हादसे के बाद उन्हें येरवडा के शुभंकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान शाम को उनकी मौत हो गई।
15 दिन से हो रही थी खुदाई
लक्ष्मी नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक युवराज नंद्रे के मुताबिक, घटनास्थल पर पिछले 15 दिनों से जल निकासी लाइन बिछाने का काम चल रहा था। पुलिस का कहना है कि खुदाई वाली जगह के चारों ओर बैरिकेड भी लगाए गए थे, लेकिन अगर बैरिकेड लगे थे, तो हादसा किन परिस्थितियों में हुआ? क्या वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था थी? क्या रात-दिन गड्ढे की निगरानी की जा रही थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही साफ हो सकेंगे।
बुजुर्ग की मौत के बाद हरकत में आई पुलिस
पुलिस को घटना की जानकारी 18 अक्टूबर की सुबह अस्पताल से मिली मेडिकल-लीगल केस की सूचना के जरिए हुई। शुरुआत में बताया गया था कि एक वाहन फिसलकर गड्ढे में गिर गया और इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, बाद में पुलिस ने मृतक के परिवार से संपर्क किया और घटना की जानकारी जुटाई। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, परिवार ने बताया है कि अंतिम संस्कार के बाद वे थाने पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। फिलहाल पुलिस के अनुसार, मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सरकार और प्रशासन से सवाल?
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जांच का भी विषय है। सड़क खोदने की अनुमति देने से लेकर बैरिकेड लगाने, सुरक्षित रास्ता बनाने और काम की निगरानी करने तक, संबंधित विभागों की भूमिका की जांच जरूरी है। अगर सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे, तो हादसा कैसे हुआ? और अगर इंतजामों में कोई कमी थी, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि हादसा प्रशासन की लापरवाही से ही हुआ। लेकिन एक बुजुर्ग की जान जाने के बाद खुदाई स्थल की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों की जवाबदेही की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
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