Mumbai Safety : देश की मायानगरी मुंबई में कई दिग्गज नेताओं और बॉलीवुड सितारों पर होने वाले हमले गंभीर सवाल खड़े करते हैं, यह तो बात हुई नेता और अभिनेताओं की जिनकी सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी महाराष्ट्र पुलिस के कंधों पर रहती है और हर बार पुलिस उसमें फेल हुई है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता का विषय है आम जनता की सुरक्षा का?

बाबा सिद्दीकी की हत्या, सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग और अब अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले ने एक बार फिर महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था और सरकार को सीधे कानूनी कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है?

इसके साथ ही टाइगर श्रॉफ पर हुए इस जानलेवा हमले के बाद महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ राजनीति आलौचना और बयानबाजी का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। सवाल हाई-प्रोफाइल लोगों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा का है। पुलिस की व्यवस्था पर करोड़ों लोगों को भरोसा होता है। लेकिन इस तरह के हादसे पुलिस की सुरक्षा पर बार बार सवाल उठाते रहे हैं।

मुंबई में अपराधियों के हौसले बुलंद?

18 अक्टूबर 2026 की रात मुंबई के जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की घटना सामने आई। टाइगर श्रॉफ सेफ हैं, लेकिन उनके ड्राइवर समेत 2 लोग इस हमले में घायल हो गए। हमले की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुटी। फिलहाल पुलिस हमलावरों की तलाश में टीमें गठित कर जांच में जुटी है। इस की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली। जबकि पुलिस ने इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की।

यह घटना इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि इससे पहले भी मुंबई में चर्चित हस्तियों को निशाना बनाया गया और धमकी तक दी गई। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अपराधी पुलिस की कार्रवाई से बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं? अगर ऐसा है, तो मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जा रहे हैं?

सरकार पर सवाल उठना लाजमी

इस तरह के हमले होने के बाद महाराष्ट्र सरकार का सवालिया घेरे में खड़ा होना लाजमी है, क्योंकि जनता जब किसी को अपने मत द्वारा एक राज्य का नेता बनाती है। तब सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने राज्य में रहने वाली जनता की सुरक्षा को लेकर होती है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार बीते कई वर्षों में इसे लेकर कई बार आलोचकों का शिकार हुए है।
जहां नेता और अभिनेता तक सुरक्षित नहीं है, वहां आम जनता की सुरक्षा का भरोसा दूर तक नहीं किया जा सकता। क्योंकि सरकार ही पुलिस को आदेश देती है, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई करती है। लोगों को सुरक्षा देती है। ऐसे में टाइगर श्रॉफ पर हुए इस हमले के बाद सरकार का सवालों के घेरे में आना लाजमी है?

पूर्व में बाबा सिद्दीकी की हत्या से उठे थे सवाल

साल 2024 के अक्टूबर महीने में पूर्व महाराष्ट्र मंत्री और NCP नेता बाबा सिद्दीकी की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक को झकझोर दिया था। हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था और संभावित हमलावरों पर निगरानी जैसे मुद्दों पर सवाल उठे। किसी राजनीतिक नेता की हत्या केवल वारदात नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था मांग भी करती है।

सलमान खान के घर पर फायरिंग

14 अप्रैल 2024 को अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर फायरिंग हुई। मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच की और आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (MCOCA) के तहत कार्रवाई की। जांच में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों के नाम भी सामने आए। घटना अहम सवाल छोड़ गई कि जब किसी व्यक्ति को पहले से धमकियां मिल रही हैं तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पहले क्यों नहीं?

महाराष्ट्र सरकार से सवाल,जवाबदेही किसकी?

महाराष्ट्र सरकार और गृह विभाग के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। खुफिया तंत्र कितना सक्रिय है? क्या संगठित अपराध गिरोहों की गतिविधियों और संभावित हमलों से जुड़े इनपुट समय पर जुटाए जा रहे हैं? धमकियों का आकलन कैसे होता है? क्या खतरे का सामना कर रहे लोगों की सुरक्षा नियमित रूप से समीक्षा के दायरे में आती है? अपराधियों तक हथियार कैसे पहुंचते हैं?
अवैध हथियारों की आपूर्ति और शूटरों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए क्या प्रभावी कार्रवाई हो रही है? गिरोहों के नेटवर्क पर कितना दबाव है? जेल में बंद या विदेश में मौजूद कथित अपराधियों के सहयोगियों और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई कितनी प्रभावी है?

पुलिस की जवाबदेही कैसे तय होगी? इन सवालों का जवाब केवल बयानों से नहीं, बल्कि जांच के नतीजों, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था में दिखाई देने वाले सुधारों से मिलना चाहिए।

आखिर किस गैंग का हाथ

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी, सपनों का शहर और बॉलीवुड की पहचान। जिस महानगर की सुरक्षा व्यवस्था को देश के सबसे मजबूत शहरी पुलिस तंत्रों में गिना जाता है, वहां अगर बड़े नेताओं, फिल्मी सितारों और चर्चित हस्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे तो यह चिंता का विषय है। सवाल सिर्फ कुछ वीआईपी लोगों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है, जिसके दम पर मुंबई के करोड़ों लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने वाले मामलों और चर्चित हस्तियों को मिल रही धमकियों ने एक बार फिर मुंबई की कानून-व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।
हालांकि, हर धमकी के पीछे इसी गैंग का हाथ होने का निष्कर्ष जांच से पहले नहीं निकाला जा सकता, लेकिन ऐसी घटनाओं को हल्के में लेना भी किसी बड़ी चूक से कम नहीं होगा।
जब किसी गैंगस्टर का नाम बार-बार सुर्खियों में आता है और हाई-प्रोफाइल लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है, तो महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस से जवाबदेही की मांग स्वाभाविक है।

सरकार और पुलिस को करना होगा तय

बाबा सिद्दीकी की हत्या, सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग और टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी जैसी घटनाएं महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस के सामने कई सवाल खड़े करती हैं। इन घटनाओं से यह तो साफ है कि सुरक्षा तंत्र कमजोर है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि अपराध के खिलाफ वह कोई रणनीति तय करे। पुलिस की खुफिया और जांच क्षमता को मजबूत करे। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

सबसे बड़ा सवाल?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुंबई की पहचान उसकी रफ्तार और चकाचौंध भरी जिंदगी नहीं बल्कि खौफ के साए में सिमट कर रह गई है। क्योंकि अपराधियों में कानून का डर नहीं है और पुलिस में सरकार का भय नहीं?

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