गाजियाबाद: गाजियाबाद में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए शाहबेरी तक नया रास्ता बनाने की तैयारी है। करीब 131 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत नाले को पक्का कर उसके ऊपर सड़क बनाई जाएगी। इससे लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस योजना के साथ कुछ जरूरी सवाल भी जुड़े हैं। अगर भविष्य में नाले में गाद जमा हुई या पानी की निकासी बाधित हुई, तो सफाई कैसे होगी? क्या सड़क को नुकसान पहुंचाए बिना नाले का रखरखाव संभव होगा? परियोजना की सफलता केवल सड़क बनने पर नहीं, बल्कि जलनिकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर भी निर्भर करेगी।
1.75 किलोमीटर लंबा होगा रास्ता
प्रस्तावित योजना के तहत गाजियाबाद के साउथ साइड औद्योगिक क्षेत्र की रेलवे लाइन से एबीईएस कॉलेज होते हुए शाहबेरी तक करीब 1,752 मीटर लंबा रास्ता बनाया जाएगा। इसके लिए नाले को पक्का कर ढकने और उसके ऊपर 12 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना है। परियोजना पर करीब 131 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस रास्ते से शाहबेरी, क्रॉसिंग रिपब्लिक और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ओर आने-जाने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
शासन से मंजूरी, लेकिन रखरखाव पर भी सवाल
मीडिया रिपोर्टों में गाजियाबाद नगर निगम के मुख्य अभियंता एनके चौधरी के हवाले से परियोजना को शासन से मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इस परियोजना का आधिकारिक स्वीकृति पत्र या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में निर्माण की समयसीमा, तकनीकी डिजाइन और रखरखाव से जुड़ी व्यवस्थाओं की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
हर तीन मीटर पर डक्ट, सफाई में कितनी होगी आसानी?
रिपोर्ट के मुताबिक, नाले की सफाई और रखरखाव के लिए हर तीन मीटर पर डक्ट बनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर सड़क के नीचे बने नाले तक पहुंच आसान करना है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन डक्ट के जरिए गाद और कचरे की नियमित सफाई प्रभावी ढंग से हो सकेगी? नाले की सफाई की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी और निरीक्षण कितनी नियमितता से किया जाएगा, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।
बारिश में जलभराव का खतरा कैसे रुकेगा?
नाले को ढककर सड़क बनाने से पहले उसकी जलनिकासी क्षमता और बारिश के दौरान पानी के बहाव का आकलन बेहद जरूरी है। यदि गाद या कचरे के कारण पानी का रास्ता बाधित होता है, तो आसपास जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए परियोजना में नाले की क्षमता, सफाई के इंतजाम और आपात स्थिति में रखरखाव की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा।
यह भी पढ़ें: टोल प्लाजा पर गंदे टॉयलेट की फोटो भेजने पर ₹1,000 का इनाम, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल