नई दिल्ली: अक्सर हम हाईवे पर सफर के दौरान टोल प्लाजा के टॉयलेट इस्तेमाल करते है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि टोल प्लाजा के आस पास के टॉयलेट काफी गंदे मिलते हैं जिससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ऐसे में सवाल उठता है कि जब आम जनता को बुनियादी सुविधाएं ही ठीक से नहीं मिल रहीं, तो सरकार जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्ती क्यों नहीं दिखाती है?

लेकिन अब NHAI ने गंदे टॉयलेट की फोटो भेजने वाले यात्रियों को ₹1,000 का इनाम देने और सफाई व्यवस्था में लापरवाही करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई के नियम सख्त किए हैं। हालांकि, असली चुनौती यह है कि इन कदमों से जमीन पर सफाई कितनी सुधरती है, यह देखने वाली बात होगी।

2026 में अब तक 429 यात्रियों को मिला इनाम

बता दे कि NHAI की 23 जुलाई 2026 की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, साल 2026 में अब तक करीब 429 यात्रियों को गंदे टॉयलेट की शिकायत करने पर ₹1,000 का FASTag रिचार्ज दिया जा चुका था। इस हिसाब से कुल करीब 4.29 लाख रुपये का FASTag रिचार्ज इनाम के रूप में दिया गया हैं।

हालांकि NHAI ने इस पहल को आगे जारी रखने के लिए इसकी अवधि 30 जून 2027 तक बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य यात्रियों की भागीदारी बढ़ाना और नेशनल हाईवे पर टॉयलेट की साफ-सफाई में सुधार करना है।

गंदे टॉयलेट की शिकायत कैसे करें?

योजना का लाभ लेने के लिए यात्रियों को Rajmargyatra मोबाइल ऐप के लेटेस्ट वर्जन का इस्तेमाल करना होगा। इसके जरिए टोल प्लाजा पर बने गंदे टॉयलेट की स्पष्ट तस्वीर अपलोड की जा सकती है।

शिकायत दर्ज करते समय इन बातों का ध्यान रखना होगा:

* टॉयलेट की साफ और स्पष्ट तस्वीर होनी चाहिए।
* फोटो जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड होनी चाहिए, यानी उसमें लोकेशन और समय की जानकारी हो।
* शिकायत के साथ नाम, लोकेशन, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल नंबर देना होगा।
* तस्वीर और शिकायत की जांच के बाद ही इनाम के लिए पात्रता तय होगी।

NHAI के मुताबिक, तस्वीरों की जांच AI की मदद से और जरूरत पड़ने पर मैन्युअल तरीके से भी की जाएगी। पात्र शिकायत मिलने पर संबंधित वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़े FASTag में ₹1,000 का रिचार्ज किया जाएगा।

इनाम पाने के लिए जान लें जरूरी शर्तें

इस योजना में हर शिकायत पर इनाम मिलना जरूरी नहीं है। इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं।

सबसे पहले, एक वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर को पूरी योजना की अवधि में केवल एक बार इनाम मिलेगा। यह रकम नकद नहीं दी जाएगी और न ही इसे किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर किया जा सकता है।

इसके अलावा, एक ही टॉयलेट की कई शिकायतें एक दिन में मिलने पर केवल पहली वैध शिकायत पर विचार किया जाएगा। फोटो स्पष्ट होनी चाहिए और योजना की शर्तों के मुताबिक होनी चाहिए।

यह योजना केवल उन्हीं टॉयलेट पर लागू है, जो NHAI के अधिकार क्षेत्र में बनाए गए हैं, संचालित किए जाते हैं या जिनका रखरखाव प्राधिकरण के तहत होता है। पेट्रोल पंप, ढाबों और दूसरी ऐसी सार्वजनिक सुविधाओं के टॉयलेट इसमें शामिल नहीं हैं, जो NHAI के नियंत्रण में नहीं आते।

टॉयलेट की सफाई के लिए अब हर हफ्ते होगा निरीक्षण

NHAI ने टोल प्लाजा पर टॉयलेट और अन्य सुविधाओं के रखरखाव को लेकर निगरानी व्यवस्था सख्त करने की घोषणा की है। इसके तहत संबंधित अधिकारी कम से कम सप्ताह में एक बार टॉयलेट ब्लॉक, टोल कलेक्शन बूथ, प्रशासनिक भवन, आसपास के क्षेत्रों और साइनबोर्ड की स्थिति का निरीक्षण करेंगे। अगर निरीक्षण के दौरान गंदगी या दूसरी कमियां मिलती हैं, तो संबंधित यूजर फीस कलेक्शन एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और साथ ही एजेंसी को निर्धारित समय के भीतर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे।

साथ ही नोटिस और तारीख वाली तस्वीरें NHAI के Data Lake पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी। संबंधित एजेंसी को भी अपना जवाब देने और सुधार के बाद की तस्वीरें जमा करने की जिम्मेदारी होगी।

बार-बार लापरवाही पर एजेंसियों को टेंडर से रोका जा सकता है

NHAI के मुताबिक, अगर किसी एजेंसी के संचालन वाले कुल टोल प्लाजा के कम से कम 10 प्रतिशत के बराबर संख्या में कमियों से जुड़े नोटिस लंबित हो जाते हैं, तो उस एजेंसी को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया जा सकता है।

ऐसी स्थिति में संबंधित एजेंसी को टोल प्लाजा, नियमित टोल प्लाजा अनुबंध, सिविल वर्क या NHAI की अन्य बोलियों में हिस्सा लेने से 15 दिनों तक या सभी लंबित कमियां दूर होने तक रोका जा सकता है।

यात्रियों को इनाम के साथ साफ टॉयलेट मिलना भी जरूरी

हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए साफ टॉयलेट एक बुनियादी जरूरत है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्वच्छ शौचालय की सुविधा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में गंदे टॉयलेट की शिकायत करने पर इनाम देना यात्रियों को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

लेकिन व्यवस्था की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि कितने लोगों को ₹1,000 का रिचार्ज मिला। यह भी देखना होगा कि शिकायतों के बाद सफाई कितनी जल्दी होती है।

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