असम विधानसभा में हंगामे के बीच UCC बिल पारित, लिव-इन और शादी से जुड़े नियम हुए सख्त

असम विधानसभा ने बुधवार को ' UCC असम 2026' विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

14 घंटे पहले

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असम विधानसभा ने बुधवार को ' UCC असम 2026' विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा, जबकि विपक्ष इसे एक विशेष समुदाय के अधिकारों पर असर डालने वाला कदम बता रहा है।

विधानसभा में विधेयक को लेकर हुई तीखी बहस

विधानसभा में इस विधेयक को लेकर पूरे दिन तीखी बहस चली। विपक्षी दलों ने मांग की कि बिल को विस्तृत चर्चा के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए,लेकिन स्पीकर रंजीत कुमार दास ने इस मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने 'भारत माता की जय' और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधेयक को पारित कराने का प्रस्ताव रखा और अंत इसे ध्वनि मत से मंजूरी मिल गई। बिल पारित होते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया।

सोमवार को विधानसभा में पेश हुआ था विधेयक

यह विधेयक सोमवार को विधानसभा में पेश किया गया था। इसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा देगा और पारिवारिक मामलों में समानता सुनिश्चित करेगा। हालांकि, विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि असम में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा।

विशेष वर्ग को निशाना बना रही सरकार: विपक्ष

नए कानून के तहत बहुविवाह या 2 विवाह करने पर 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं,लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण नहीं कराने पर 3 महीने तक की कैद हो सकती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप कर सकता है। उनका आरोप है कि सरकार सामाजिक सुधार के नाम पर एक विशेष वर्ग को निशाना बना रही है।

'UCC से एक समान न्याय व्यवस्था स्थापित होगी'

दूसरी ओर, भाजपा सरकार का कहना है कि यूसीसी संविधान की समानता की भावना को मजबूत करता है और इससे समाज में एक समान न्याय व्यवस्था स्थापित होगी। अब इस कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना है।

Written By: Geeta Sharma 

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