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भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए उन्हें रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की पांच देशों की यात्रा के दौरान नीदरलैंड पहुंचने पर दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने डच समकक्ष Rob Jetten से मुलाकात की और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर जोर
बैठक ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका प्रभाव केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है,बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों ने स्वतंत्र नौवहन और वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही का समर्थन किया। उन्होंने किसी भी प्रकार के प्रतिबंधात्मक कदमों का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया।
भारत और नीदरलैंड के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत और नीदरलैंड के बीच कुल 17 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए,जिनमें रक्षा,निवेश, हरित ऊर्जा,महत्वपूर्ण खनिज और उभरती प्रौद्योगिकियां प्रमुख हैं। दोनों देशों ने व्यापार और निवेश,रक्षा एवं सुरक्षा तथा सेमीकंडक्टर,अंतरिक्ष,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 'रणनीतिक साझेदारी रूपरेखा'की शुरुआत की। इसके साथ ही हरित हाइड्रोजन के विकास को लेकर भी नई रूपरेखा तैयार की गई।
रक्षा क्षेत्र को लेकर लिया गया अहम फैसला
रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के संयुक्त निर्माण की संभावनाओं पर सहमति जताई। इसके तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों की स्थापना पर भी विचार किया जाएगा। इससे भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक दृष्टि से भी नीदरलैंड भारत के महत्वपूर्ण साझेदार
आर्थिक दृष्टि से भी नीदरलैंड भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा, 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। रॉटरडैम बंदरगाह के माध्यम से नीदरलैंड भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का एक प्रमुख प्रवेश द्वार भी माना जाता है।
ऊर्जा और सांस्कृतिक में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
वार्ता के दौरान विज्ञान, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संकट सहित अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। यह रणनीतिक साझेदारी भारत और नीदरलैंड के संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक और सामरिक सहयोग को भी मजबूत करेगी।
Written By: Geeta Sharma

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