रसोई से इंटरनेट तक पहुंचा LPG संकट, जानें कैसे जुड़ा है इसका कनेक्शन

मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब भारत में देखने को मिल रहा है। देश में LPG की कमी अब सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी दिख सकता है।

22 घंटे पहले

LPG Crisis Impact on Telecom Network: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावटों का असर अब भारत में भी दिखाई दे रहा है। बता दें की देश में LPG की कमी सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रही बल्कि अब इसका असर टेलीकॉम सेक्टर पर भी महसूस होने लगा है। अगर गैस की कमी लगातार बनी रहती है, तो मोबाइल टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर हमारे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर पड़ सकता है। आम लोगों के लिए ये बात चौंकाने वाली हो सकती है कि रसोई की गैस और डिजिटल सेवाओं का आपस में क्या संबंध है। आइए जानते हैं कि सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और इसका सीधा असर आपके दैनिक जीवन पर कैसे पड़ सकता है।

टेलीकॉम कंपनियों को क्यों चाहिए LPG?

टेलीकॉम टावर बनाने में गैल्वनाइजेशन जैसी प्रक्रिया का इस्तेमाल होता है, जिसमें LPG या गैस-आधारित ईंधन की जरूरत होती है। अगर LPG सप्लाई बाधित रहती है, तो टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन धीमा पड़ सकता है या कुछ यूनिट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर नए टेलिकॉम टावर लगाने और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर पड़ेगा। भारत में मोबाइल नेटवर्क का बड़ा हिस्सा टेलिकॉम टावरों पर निर्भर करता है। देश भर में लाखों टावर मोबाइल कॉल, इंटरनेट और डेटा सेवाओं को चलाते हैं। अगर नए टावर लगना स्लो हो जाए या नेटवर्क अपग्रेड रुक जाए, तो आने वाले समय में कनेक्टिविटी पर असर दिख सकता है—खासकर उन इलाकों में जहां पहले से नेटवर्क कमजोर है।

एलपीजी का टेलीकॉम सेक्टर में उपयोग

रिपोर्ट्स के अनुसार, मोबाइल टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों में स्टील और लोहे की जंग से बचाव के लिए गैल्वेनाइजेशन प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में LPG या LNG की जरूरत होती है। सप्लाई में रुकावट होने पर टावर निर्माण में देरी होगी और नेटवर्क विस्तार प्रभावित हो सकता है।

गैस की कमी का डिजिटल असर

एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं में कोई बड़ी रुकावट नहीं आने वाली है लेकिन अगर LPG की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो नेटवर्क विस्तार और 5G रोलआउट की गति धीमी पड़ सकती है। इसका असर टेलीकॉम कंपनियों की योजनाओं पर पड़ेगा और कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क क्षमता बढ़ाने का काम रुक सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि LPG संकट केवल टेलीकॉम सेक्टर तक सीमित नहीं है। कई शहरों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय भी गैस की कमी का सामना कर रहे हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया है। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सीधे सप्लाई चेन पर पड़ता है।

Written By - Namita Verma

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