NASA Satellite Crash: 600 किलो की ‘आफत’ आज आसमान से गिरेगी, धरती से टकराने का खतरा!

नासा का 600 किलो वज़न वाला Van Allen Probe-A सैटेलाइट आज यानी 10 मार्च 2026 को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा।

10 March 2026

NASA Satellite Crash: आज यानी 10 मार्च 2026 को नासा का 600 किलो वज़न वाला Van Allen Probe-A सैटेलाइट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रहा है। आपको बता दें की इसे अगस्त 2012 में लॉन्च किया गया था और 14 साल बाद यह अपना आखिरी सफर पूरा कर रहा है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, यह भारतीय समय के अनुसार रात 8-9 बजे के बीच वायुमंडल में घुसेगा, लेकिन इसमें 24 घंटे तक का अंतर हो सकता है। ज्यादातर हिस्सा वायुमंडलीय घर्षण में जल जाएगा और कुछ मजबूत हिस्से बच सकते हैं, हालांकि पृथ्वी पर किसी को नुकसान होने की संभावना बहुत कम है।

असल में यह सैटेलाइट क्या था और इसका उद्देश्य क्या था?

Van Allen Probe-A और इसका जुड़वां Probe-B पृथ्वी के रेडिएशन बेल्ट यानी विकिरण क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए बनाए गए थे। ये बेल्ट पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की मदद से सूरज से आने वाले खतरनाक कणों को रोकते हैं। इन सैटेलाइट्स का नाम वैज्ञानिक जेम्स वैन एलन के नाम पर रखा गया। दोनों सैटेलाइट्स 2012 में लॉन्च हुए और उनका मिशन मूल रूप से सिर्फ दो साल का था, लेकिन ये 2019 तक काम करते रहे। प्रोब बी जुलाई 2019 में और प्रोब ए अक्टूबर 2019 में बंद हो गए। ये उपग्रह पृथ्वी के 621 km से लेकर 304,155 km तक की अण्डाकार कक्षा में घूमते थे, जिससे रेडिएशन बेल्ट का पूरा डेटा एकत्र किया गया। आज भी वैज्ञानिक उस डेटा का उपयोग करके यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि सूरज की गतिविधि सैटेलाइट्स, अंतरिक्ष यात्रियों, GPS, इंटरनेट और बिजली के तारों को कैसे प्रभावित करती है।

वायुमंडल में प्रवेश और गिरने वाले टुकड़े

जब यह सैटेलाइट वायुमंडल में प्रवेश करेगा, तो तेज़ घर्षण की वजह से इसका लगभग 99% हिस्सा जलकर राख हो जाएगा। नासा के अनुसार कुछ मजबूत हिस्से, जैसे टाइटेनियम के टुकड़े, बच सकते हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण ज्यादातर टुकड़े खुले समुद्र में ही गिरेंगे। चूंकि पृथ्वी का 70% हिस्सा पानी से ढका है, इसलिए शहर या गांव में गिरने की संभावना बहुत कम है। पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी और ज्यादातर लोग इसे देख भी नहीं पाएंगे, क्योंकि यह रात के समय और समुद्र के ऊपर होगा।

क्या हमें डरना चाहिए?

बिल्कुल नहीं। खतरा केवल 0.02% है, यानी बेहद कम। अधिकांश टुकड़े समुद्र में गिरेंगे और जो बचेंगे वे इतने छोटे और हल्के होंगे कि किसी को चोट लगने की संभावना लगभग न के बराबर है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि उपग्रह कितने साल काम करते हैं और सूरज की गतिविधि कैसे पृथ्वी और हमारे तकनीकी सिस्टम्स को प्रभावित करती है।

Written By - Namita Verma

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