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1877 में न्यूकैसल (न्यू साउथ वेल्स) से मेलबर्न जा रहा आयरन स्टीमर SS City of Hobart जहाज डूब गया था। जहाज में 615 टन कोयला लदा हुआ था। बता दें कि यात्रा शुरू हुई और सब कुछ सामान्य था, लेकिन समुद्र ने अचानक अपना खतरनाक रूप दिखाया और प्रोपेलर शाफ्ट टूट गया और जहाज के हल में छेद हो गया। पानी तेजी से जहाज में समाने लगा। कप्तान और क्रू ने तुरंत स्थिति का आकलन किया और जीवनरक्षक नौकाओं में कूदकर खुद को बचाया। अगले दिन उन्हें सुरक्षित बचाया लिया गया, लेकिन जहाज का कोई पता नहीं चला।
150 साल बाद मिल जहाज
150 साल बीत गए, और मार्च 2026 में यह रहस्य हल हुआ। गिप्सलैंड कोस्ट से लगभग 30 किलोमीटर दूर, 60 मीटर की गहराई में SS City of Hobart का मलबा मिला हैं। खोज Iberdrola Australia कंपनी की समुद्र सर्वे टीम ने की, जो अपने Aurora Green प्रोजेक्ट के लिए समुद्र की जांच कर रही थी। इसके बाद, Southern Ocean Exploration के गोताखोरों ने डाइविंग करके खोज की पुष्टि की।
मलबा बना ‘शमशान’
मलबा देखकर इतिहासकार और गोताखोर दोनों ही हैरान हो गए थे। जहाज सिर्फ कोयला लेकर जिसके कारण जहाज में कोई कीमती चीज नहीं मिली। लकड़ी और आयरन का ढांचा मछलियों और समुद्री जीवों से ढका हुआ था। बता दें कि समय के साथ लकड़ी सड़ चुकी थी और यह मलबा लगभग ‘शमशान’ जैसी दिखने लगा है। वहीं, बता दें कि समुद्र ने अपनी कला के साथ इतिहास को संरक्षित कर रखा है।
समुद्र में छुपे कई राज
हालांकि कोई खजाना नहीं मिला, यह खोज इतिहास में अमूल्य है। यह 19वीं सदी के मरीन इंजीनियरिंग, जहाज निर्माण और व्यापार की कहानी बयान करता है। यह दिखाता है कि समुद्र कितने राज छुपाए रखता है। लेकिन एक और रहस्य अब भी बना हुआ है। ‘होली ग्रेल ऑफ शिपरेक्ट्स’ Madagascar नामक जहाज, जो 1853 में विक्टोरियन गोल्ड रश के दौरान सोना लेकर जा रहा था, आज तक नहीं मिला। कहा जाता है कि यह किंग आइलैंड के पास डूबा था, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला। SS City of Hobart का मलबा सोने का नहीं, लेकिन इतिहास और समुद्री जीवन का खजाना लेकर आया है। यह खोज हमें याद दिलाती है कि समुद्र के गहरे पानी में कितनी कहानियां और रहस्य अभी भी दबी हुई हैं।
Written By Toshi Shah

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