नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार हुआ है और इसका निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 90 फीसदी से अधिक पर पहुंच गया है। हालांकि, माल ढुलाई की ऊंची लागत, डीजल की मजबूत कीमतों और महंगी प्राकृतिक गैस के कारण ऊर्जा की लागत पर दबाव बने रहने की आशंका है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक रिपोर्ट में यह आकलन सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को छोड़कर मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 90 फीसदी से ऊपर पहुंच गया है। ओमान की खाड़ी में हमलों की घटनाओं के बावजूद आपूर्ति में यह सुधार दर्ज किया गया है। वहीं, कच्चे तेल के भौतिक बाजार में प्रीमियम पिछले सप्ताह 65 फीसदी घटकर 9 डॉलर प्रति बैरल रह गया, जो उपलब्धता बेहतर होने का संकेत है।

माल ढुलाई की लागत अब भी बड़ी चुनौती

आपूर्ति में सुधार के बावजूद तेल की शिपिंग लागत काफी ऊंची बनी हुई है। जेफरीज के अनुसार, माल ढुलाई की दरें संघर्ष की शुरुआत के मुकाबले करीब आठ गुना तक पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की कुल पहुंच लागत में माल ढुलाई की हिस्सेदारी बढ़कर 25 फीसदी से अधिक हो गई है, जबकि संघर्ष से पहले यह लगभग 3 फीसदी थी।

तेल टैंकरों पर हमलों के कारण निकट भविष्य में माल ढुलाई की लागत ऊंची बने रहने की आशंका है। इससे कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होने के बावजूद ऊर्जा बाजार पर दबाव जारी रह सकता है।

रिफाइनिंग मार्जिन ऊंचे, पेट्रोल-डीजल कंपनियों पर दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनिंग मार्जिन में सप्ताह-दर-सप्ताह कुछ गिरावट आई है, लेकिन वे अब भी ऊंचे स्तर पर हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सिंगापुर का औसत ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन 14 डॉलर प्रति बैरल रहा।

इसी अवधि में पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन के मूल्य अंतर क्रमशः 26 डॉलर, 69 डॉलर और 68 डॉलर प्रति बैरल रहे। जेफरीज का मानना है कि सप्लाई चेन को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान रिफाइनिंग मार्जिन ऊंचे बने रह सकते हैं।

रिपोर्ट में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर भी दबाव का उल्लेख किया गया है। 15 दिनों के औसत मूल्य के आधार पर पेट्रोल की बिक्री पर प्रति लीटर 28 रुपये और डीजल पर 34 रुपये का अनुमानित नुकसान बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों की खरीद लागत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के भारतीय कच्चे तेल बास्केट मूल्य के बराबर थी।

पेट्रोकेमिकल कारोबार में रिलायंस को सहारा

जहां ईंधन कारोबार में लागत का दबाव बना हुआ है, वहीं पेट्रोकेमिकल उत्पादों के मार्जिन में मजबूती आई है। जेफरीज के मुताबिक, पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) के औसत मार्जिन फरवरी के अंत के मुकाबले 68 फीसदी अधिक रहे।

इस सुधार से रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार की लाभप्रदता को समर्थन मिलने की संभावना है।

गैस की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर

रिपोर्ट के मुताबिक, स्पॉट लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें पिछले सप्ताह 12 फीसदी बढ़कर औसतन 29 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) हो गईं।

यूरोप में गैस भंडारण का स्तर 75 फीसदी रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 83 फीसदी था। सर्दियां नजदीक आने के साथ गैस की कीमतें ऊंची रहने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट ने मौजूदा कीमतों पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की वहनीयता को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।

रूस से तेल आयात पर अमेरिकी राहत

जेफरीज ने यह भी कहा कि अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून के तहत कुछ प्रमुख शुल्कों में 60 दिनों की छूट दी है। इससे रूस से कच्चे तेल का आयात करने वाले भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों पर संभावित दबाव कम हो सकता है।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार ऊर्जा बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। लेकिन ऊंची शिपिंग लागत, रिफाइनिंग मार्जिन और गैस की कीमतों के चलते ईंधन की लागत पर दबाव जल्द खत्म होने की संभावना कम है। रिपोर्ट में दिए गए ये आकलन बाजार की मौजूदा स्थितियों पर आधारित हैं; इनसे भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

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