UP Chunav BJP Incharge: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी बनाया है। महाराष्ट्र से आने वाले तावड़े के पास संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों को साधने का लंबा अनुभव है। यही वजह है कि बिहार में एनडीए की बड़ी जीत के बाद पार्टी ने अब उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है।

बिहार में तावड़े ने कैसे बनाई अपनी जगह?

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के पीछे विनोद तावड़े की संगठनात्मक भूमिका को अहम माना गया। बतौर प्रभारी उन्होंने गठबंधन के अलग-अलग दलों के बीच तालमेल बैठाने पर खास जोर दिया।नीतीश कुमार, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं के बीच सीट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति तक कई स्तरों पर समन्वय बनाने की जिम्मेदारी तावड़े के पास रही। मुश्किल वक्त में बातचीत के जरिए रास्ता निकालना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा।चिराग पासवान की सीटों को लेकर चल रही बातचीत के दौरान भी तावड़े ने व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीतिक समीकरणों का इस्तेमाल करते हुए रास्ता निकालने की कोशिश की। इसके अलावा युवा चेहरों को पार्टी से जोड़ने और उन्हें चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति ने भी गठबंधन को फायदा पहुंचाया।

सिर्फ बिहार नहीं, दूसरे राज्यों में भी निभा चुके हैं बड़ी भूमिका

विनोद तावड़े का संगठनात्मक अनुभव सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। केरल में पार्टी संगठन को मजबूत करने की चुनौती के बीच भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया। वहां बीजेपी को कुछ अहम सीटों पर जीत दिलाने में उनकी भूमिका रही।हरियाणा में भी वह पार्टी के प्रभारी रह चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार की जीत के लिए भी उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गई थीं। इन अनुभवों ने पार्टी के भीतर उनकी रणनीतिक क्षमता को और मजबूत किया।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

विनोद तावड़े की राजनीति की शुरुआत छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई। कॉलेज के दिनों में संगठन से जुड़ने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे बीजेपी में अपनी जगह बनाई।वह महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे और बाद में विधानसभा पहुंचे। देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें केंद्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां देना शुरू किया। पार्टी के महासचिव के तौर पर भी वह संगठन से जुड़े कई अहम काम संभाल चुके हैं।बिहार चुनाव में उनकी भूमिका के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर भी बड़ा भरोसा जताया।

यूपी में पहले से सक्रिय थे तावड़े

यूपी का प्रभारी बनाए जाने से पहले भी विनोद तावड़े पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय थे। संगठन से जुड़े कार्यक्रमों से लेकर सरकार और पार्टी के बीच समन्वय तक उनकी मौजूदगी नजर आ रही थी।इसी सक्रियता के चलते उनके यूपी प्रभारी बनाए जाने की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं। अब पार्टी ने आधिकारिक तौर पर उन्हें यह जिम्मेदारी देकर चुनावी रणनीति की दिशा भी साफ कर दी है।

क्या बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में भी चलेगा?

यूपी में तावड़े के सामने सबसे बड़ी चुनौती समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की मजबूत राजनीतिक पकड़ का मुकाबला करने की होगी। बिहार में उन्होंने जिस तरह एनडीए के सहयोगी दलों को एक साथ रखने और विपक्षी गठबंधन के खिलाफ रणनीति बनाने में भूमिका निभाई, उसी अनुभव को यूपी में भी आजमाया जा सकता है।हालांकि दोनों राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। यूपी में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय राजनीति और गठबंधन का गणित बिहार से काफी अलग है। इसलिए बिहार की रणनीति को हूबहू लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से नई रणनीति तैयार करना तावड़े के लिए जरूरी होगा।