उत्तर प्रदेश में बीजेपी की तरफ से आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां का आगाज हो चुका है। कल यानी सोमवार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक दिन पहले ही राष्ट्रीय महासचिव बने विनोद तावड़े को आज उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। आगामी चुनाव के लिए राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े यूपी चुनाव को धार देने का काम करेंगे। इससे पहले भी तांवड़े बिहार, हरियाणा के चुनाव में अहम जिम्मेदारी संभाल कर दी गई जिम्मेदारियों को पूरा करने में सफल रहे।
तावड़े के सामने यूपी में क्या होंगी चुनौतियां
यूपी विधानसभा चुनावों पर केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में नजरे टीकी होती है। बीते समय में जहां सरकार के सामने विकास, और बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुधारना एक बड़ी चुनौती रहा है। इस बार बीजेपी अपने वोट बैंक को सुधारने व चुनाव में बेहतर परिणाम लाने पर जहां रणनीति तैयार कर रहा है। विनोद तावड़े के कंधो पर अहम जिम्मेदारी विपक्षियों के दाव पेंच और उनकी चुनौतियों से सावधानी पूर्वक तरीके से निपटने पर रहेगी।
कौन है विनोद तावड़े
यूपी के नए प्रभारी बने विनोद तावड़े महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं। विनोद तावड़े पूर्व में भी कई राज्यों में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं। साल 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में विनोद तावड़े एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के चुनाव प्रभारी के तौर पर नियुक्त किए गए थे। उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी विनोद तावड़े सीपी राधाकृष्णन के लिए भी बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। विनोद तावड़े के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1980 के दशक में छात्र राजनीति से हुई। विनोद तावड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। बीजेपी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के जरिए विनोद तावड़े राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हुए। 1988 में विनोज तावड़े अपनी मजबूत संगठन क्षमता के आधार पर ही एबीवीपी के अखिल भारतीय महासचिव बने। साल 1994 में तावड़े ने बीजेपी में बतौर पूर्णकालिक सदस्यता ग्रहण की। 1999 में तावड़े मुंबई महानगर बीजेपी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। आपको बता दें कि इस पद को संभालने वाले तावड़े सबसे कम उम्र के नेता बने।
पार्टी ने काटा था विधायक पद का टिकट
साल 2002 से 2014 में वे महाराष्ट्र विधान परिपद के सदस्य रहे और साल 2011 में उच्च सदन में विपक्ष नेता की भूमिका निभा चुके हैं। साल 2014 में तांवड़े विधायक बने और महाराष्ट्र सरकार में शिक्षा मंत्री बने। वर्तमान में वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख पदों पर रहते हुए तावड़े बड़ी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। अकटूबर 2019 में विनोद तावड़े का विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने बोरीवली सीट से उनका टिकट काट दिया था। पार्टी ने उनकी जगह नए चेहरे सुनील राणे को उम्मीदवार बनाया था। जिसके बाद लगा कि तावड़े का चुनावी करियर लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन उस समय तावड़े ने कहा कि मैं कोशिश करुगा की जो गलती हुई हैं उन्हें सुधारु।
यूक्रेन वार में फंसे भारतीयों को निकाला
हरियाणा में बतौर राज्य प्रभारी नियुक्त रहे विनोद ने संगठन को मजबूती दी। तावड़े ने ऑपरेशन गंगा के दौरान यूक्रेन वार में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षित वतन वापसी कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बिहार के प्रभारी भी रह चुके है विनोद तावड़े
साल 2022 में विनोद तावड़े बिहार के प्रभारी नियुक्त किए गए थे। उनके ही नेतृत्व में जदयू और बीजेपी का गठबंधन और नई सरकार का गठन संभव हो पाया। विनोद तावड़े के नेतृत्व में ही बिहार में एनडीए ने साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया। साल 2025 में तावड़े के कुशल नेतृत्व का असर यह रहा कि बिहार में बीजेपी और जदयू की सरकार बनी और भाजपा की सीटों में बढ़ौतरी हुई।
इन बड़े राज्यों में भी संभाल चुके हैं चुनावी मोर्चा
केरल, गुजरात और दिल्ली समेत कई राज्यों में किया बेहतरीन काम कर चुके हैं। पूर्व में विनोद तावड़े ने त्रिपुरा और राजस्थान में मुख्यमंत्री चुनाव के पर्यवेक्षक की भूमिका निभाई। साल 2026 में केरल राज्य में हुए चुनाव में तावड़े बतौर प्रभारी नियुक्त किए गए। इनके नेृतत्व में ही बीजेपी सरकार ने वहा काफी अच्छा प्रदर्शन किया। पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भी पार्टी का संचालन किया था।
तावड़े के सामने होंगी यूपी में कई चुनौती
विनोद तावड़े की बेहतरीन कार्यक्षमा का ही असर है कि उन्हें यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया। लेकिन इस बार यूपी चुनाव में दर्ज करना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती रहेगा। विनोद तावड़े को एक घर में रहकर बीजेपी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के सहयोगियों को एक परिवार की तरह जोड़े रखना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा। फिलहाल इस तरह की स्थिति अभी तक सामने नहीं आई है जो पार्टी में फूट या गठबंधन को तोड़ सके। तावड़े की पहली प्राथमिकता यह भी रहेगी कि पार्टी में वह क्षेत्रीय दलों की अलग-अलग इकाइयों को हाईकमान तक सही तरीके से रखे।
सपा और कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक चालबाजी की निकालेंगे काट
यूपी में इस समय दो विपक्षी पार्टी सपा और कांग्रेस साल 2024 में इस्तेमाल किए गए पुराने फॉर्मूले को ही आधार बनाकर चुनाव की रणनीति बनाती दिख रही है। दोनों ही पार्टी इस बार बीजेपी की हार को लेकर मंथन करने में लगी है। लेकिन पार्टी को पूरा विश्वास है कि, तावड़े दोनों विपक्षी पार्टी की राजनीतिक चालबाजी की काट निकाल ही लेंगे।
एक दिन पूर्व ही नितिन नवीन की नई टीम में मिली जगह
प्रदेश प्रभारियों की नियुक्ति से ठीक 1 दिन पहले ही 17 अगस्त को नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान हुआ। इसमें कई अनुभवी चेहरों को जिम्मेदारी मिली तो पुराने चेहरे को बाहर का रास्ता दिखाया। इस टीम में महिलाओं को विशेष तवज्जों दी गई। इसी में विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महासचिव का पदभार सौंपा गया।
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Written By: MADHVI TANWAR