UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर इतिहास रचने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जमीनी स्तर पर एक बड़ा दांव खेला है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कमजोर बूथ प्रबंधन के कारण झटके झेल चुकी भाजपा ने इस बार अपनी गलतियों से सबक लेते हुए ‘बूथ चक्रव्यूह’ रणनीति तैयार की है। मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि क्या समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव भाजपा के इस मजबूत सांगठनिक घेरे को भेद पाएंगे या यह चक्रव्यूह विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा।
2024 की गलतियों से लिया सबक, अब माइक्रो-मैनेजमेंट पर जोर
2019 के मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन में आई गिरावट का मुख्य कारण कमजोर बूथ प्रबंधन को माना गया था। इसी कमी को दूर करने के लिए पार्टी ने प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में निचले स्तर तक संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने का अभियान शुरू किया है।
भाजपा के ‘बूथ चक्रव्यूह’ के मुख्य बिंदु
पार्टी अगले छह महीनों के भीतर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं के अलग-अलग ब्लॉकों में बूथ सम्मेलनों का आयोजन करेगी, ताकि जमीनी कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बनी रहे।पार्टी विरोधी प्रभाव वाले और कमजोर बूथों की पहचान कर ली गई है। यहां दूसरे शक्ति केंद्रों से अनुभवी कार्यकर्ताओं को तैनात किया जा रहा है। वोटर लिस्ट के हर पन्ने (Page) का जिम्मा 'पन्ना प्रमुख' को सौंपा गया है, जिसका काम संबंधित मतदाताओं से सीधा और निरंतर संपर्क बनाए रखना है। बूथ समितियां केवल कागजों पर न रहें, इसके लिए मंडल से लेकर प्रदेश स्तर के पदाधिकारी खुद जिलों और बूथों पर जाकर जमीनी सत्यापन कर रहे हैं। चुनाव से पहले केंद्रीय व प्रदेश स्तर के पदाधिकारी, सांसद और मंत्री अलग-अलग मंडलों व बूथों पर प्रवास करेंगे। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए टिफिन बैठकों का दौर शुरू किया गया है, जहां भोजन के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन हो रहा है।
अखिलेश यादव के लिए क्या है चुनौती?
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के दम पर शानदार प्रदर्शन किया था। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का यह कैडर-आधारित ‘बूथ चक्रव्यूह’ अखिलेश यादव के जमीनी प्रबंधन की कड़ी परीक्षा लेगा। जहां भाजपा हर घर और हर पन्ने के मतदाता तक सीधे पहुंचने की तैयारी में है, वहीं सपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने के साथ-साथ बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रबंधन को भाजपा के बराबर लाना होगा।
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Written by Shailesh Yadav