Prayagraj Belan River Flood: प्रयागराज के कोरांव इलाके में लगातार बारिश के बाद बेलन नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण देवघाट पुल बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पुल के जॉइंट्स खिसकने के बाद उसमें गहरी दरार दिखाई दी, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन इस रास्ते पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है।

पुल पर बैरिकेडिंग और बोल्डर लगाकर रास्ता बंद

पुल की स्थिति को देखते हुए सेतु निगम और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर दी है। रास्ते पर बोल्डर भी लगाए गए हैं, ताकि कोई वाहन या पैदल यात्री पुल पार करने की कोशिश न करे। पुल के दोनों ओर चेतावनी बोर्ड लगाकर इसे क्षतिग्रस्त बताते हुए रास्ता बंद होने की सूचना दी गई है।

करीब तीन दशक बाद बेलन नदी का ऐसा रौद्र रूप

स्थानीय लोगों का कहना है कि बेलन नदी में करीब तीन दशक बाद इतनी भयावह बाढ़ देखने को मिल रही है। ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 1994 के बाद पहली बार नदी का जलस्तर इस तरह बढ़ा है। तेज बहाव और पानी के दबाव ने पुल के जॉइंट्स को प्रभावित किया, जिसके बाद प्रशासन को आवागमन रोकना पड़ा।

40 से 50 गांवों का संपर्क प्रभावित

देवघाट पुल बंद होने से कोरांव क्षेत्र के करीब 40 से 50 गांवों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। इन गांवों का तहसील मुख्यालय और शहर से सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है। यह मार्ग उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश के सुनौरी और आसपास के इलाकों से जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों में भी शामिल है। ऐसे में कई यात्रियों को रास्ते में ही रुकना पड़ा है।

घरों में घुसा बाढ़ का पानी, दूसरे रास्ते भी बंद

बेलन नदी का पानी आसपास के गांवों में भी पहुंच गया है। जमुआ गांव में बाढ़ का पानी कई घरों के अंदर तक पहुंचने की बात सामने आई है। वहीं, भोगन पुल समेत इलाके के कुछ छोटे पुल पिछले कई दिनों से पानी में डूबे हुए हैं। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही और जरूरी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

पानी उतरने के बाद सामने आई पुल की खराब स्थिति

PWD के जेई बृजेश सिंह के मुताबिक, एक दिन पहले पुल के ऊपर से पानी बह रहा था। पानी का स्तर कम होने के बाद निरीक्षण किया गया तो पुल के जॉइंट्स में समस्या दिखाई दी। इसके बाद सेतु निगम और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को सूचना दी गई है।

तकनीकी जांच तक पुल पर पूरी तरह रोक

अधिकारियों के अनुसार जब तक सेतु निगम और विशेषज्ञों की टीम पुल का विस्तृत निरीक्षण नहीं कर लेती, तब तक यहां से आवागमन शुरू नहीं किया जाएगा। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया है, ताकि कोई व्यक्ति खतरा उठाकर पुल पार न कर सके।फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता पुल की तकनीकी स्थिति का आकलन करने और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। पुल की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।