लाल किले पर 80वें स्वतंत्रता दिवस के आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के साथ ही 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के गनर्स ने 21 तोपों की सलामी दी गई। स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल करने वाली इस सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत के पास है और गन पोजीशन ऑफिसर नायब सूबेदार (गनरी में असिस्टेंट इंस्ट्रक्टर) अनुतोष सरकार ने की। इसके बाद PM मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया।
PM मोदी ने लाल किले से दी सभी को आजादी की शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने लाल किले पर अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए कहा- ''मेरे प्यारे देशवासियों आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आज हर दिलों की धड़कन, वंदे मातरम के नाद से गूंज रही है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है और देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है। आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।"
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन
लाल किले पर पीएम मोदी ने देश के महान सपूतों का पुन: स्मरण किया। पीएम ने कहा- जिन्होंने देश की आजादी के लिए त्याग, बलिदान की पराकाष्ठा और अपने तप त्याग और बलिदान से आजादी के एकमात्र लक्ष्य को लेकर, अपनी पूरी जिंदगी खपा दी। पूज्य बापू के साथ-साथ सभी स्वतंत्रता सेनानियों को बलिदान की महान परंपरा जगाने वाले, महान क्रांतिकारियों को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।"
आज पहली बार लाल किले पर गूंजा वंदे मातरम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि- आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सभी के लिए ऐतिहासिक पल है। क्योंकि आजादी के बाद 15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है। हम लोग वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं, इससे बड़ा अवसर क्या हो सकता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के साथ देने की कही बात
इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों भारी बारिश के कारण देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ व भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र भी किया। पीएम ने कहा कि इस आपदा में कई परिवार प्रभावित हुए। उनके दुख दर्द को हम भलीभांति अनुभव करते हैं। पीड़ित परिवारों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम और पूरा देश उनके साथ खड़े हैं।
पीएम मोदी ने सपनों को साकार करने का दिया मूल मंत्र
देश के नोजवानों को पीएम मोदी ने उनके सपनों को साकार करने के लिए भी आज मूल मंत्र दे डाला। पीएम ने कहा कि कोई राष्ट्र उस समय महान बनता है, जब वह अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है, जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है। अब देश छोटे सपनों से चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच का विस्तार करते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाईयों से, आपदाओं के बीच से भी रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप मिल जाता है। हमारे संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए क्योंकि जब सपने ऊंचे होते हैं, संकल्प ऊंचे होते हैं तो हमारे सामर्थ्य की ऊंचाई भी बढ़ती है, हमारे प्रयासों की ऊंचाई भी बढ़ती है और तब जाकर हम सपनों को साकार कर सकते हैं।"
आजादी के 100 साल होंगे, 2047 में हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे
पीएम ने देश को ऊंचाई पर ले जाने कि बात कहते हुए संबोधन में कहा कि, आज भारत ने भी एक बहुत बड़ा सपना दृढ़ संकल्प के साथ देखा है। नई ऊंचाइयों को छूने के लिए जब आजादी के 100 साल होंगे, 2047 में हम विकसित भारत बनाकर रहेंगे। 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है तो ये दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है। दुनिया हमारी ओर देखने का नजरिया बदलने को मजबूर हो जाती है।"
पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी
पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि- देश बहुत सारे सपने लेकर आजाद हुआ था। लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए। होती है-चलती है, हो जाएगा-देखा जाएगा केवल इसी में खोए रहे। इसी का नतीजा रहा कि 2014 तक आते-आते पूरे विश्व ने हमें 'फ्रेजाइल फाइव' में डंप कर दिया था। ऐसे समय में पिछले 12 साल में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ी और हम आगे बढ़े। देश-राज्यों का संकल्प है कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प को, सामर्थ्य को रोक पाना नामुमकिन है।
पीएम ने गिनवाई पिछले 12 वर्ष की उपलब्धियां
पीएम मोदी ने बीते 12 वर्षों में की उपलब्धियों को गिनवाते हुए कहा कि- डिफेंस प्रोडक्शन करीब 4 गुना बढ़ा, खादी एवं ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब 5 गुना हुआ, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब 7 गुना बढ़ा, आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना बढ़ा, मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा, इतना ही नहीं आधुनिक युग को लेकर भी डिजिटल और इनोवेशन की दुनिया में भी हमने अपना परचम लहराया। इंटरनेट यूजर्स, इंटरनेट कंज्यूमर्स करीब-करीब 4 गुना बढ़े करीब-करीब 50 गुना बढ़े, पेटेंट ग्रांट होने की संख्या 4 गुना बढ़ी, डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े, सामान्य मानवी की सुविधा की ओर भी हमने उतनी ही गंभीरता से काम किया। हर साल औसतन 15 गुना ज्यादा तेजी से हमने नल से जल कनेक्शन दिए, हर साल औसतन 6 गुनी ज्यादा रफ्तार से लोगों को गैस कनेक्शन दिए, हर साल 4 गुनी रफ्तार से गरीबों के लिए शौचाल्य बनाने का काम किया, हर साल 3 गुना ज्यादा तेजी से गरीबों को घर देने का काम किया, देश ने गवर्नेंस में भी बहुत बदलाव हुआ। सैकड़ों की तादाद में कानूनों को खत्म किया। पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं शताब्दी की मार्च नहीं हो सकती। हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेट्रो का विस्तार किया... ये सब, ये रफ्तार, ये विस्तार, ये उपलब्धी आजादी के बाद पहली बार पिछले 1 दशक में देखी है। जब इतनी सारी सिद्धियां हमारे सामने है, इतनी तेज गति दिखाई देती हो, देशवासियों का सामर्थ्य पल-पल प्रकट होता है तब तो 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प कभी भी अधूरा नहीं रह सकता है। ये सारे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं।
देश को कच्चे तेल पर रहना पड़ रहा है निर्भर
बीते वर्षों में हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जिएगा। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता। इसलिए हमें अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। कई बार संसाधनों की कमी के कारण देश रुकता नहीं है लेकिन रुकने का कारण सोच की सीमाएं होती हैं। जब सोच बंध जाती है, सीमाओं में सड़ने लग जाती है तब हम अपने सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है और हमारी गलत सोच के कारण है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे, हमने समुद्री तट पर, 99% हमारा समुद्री तट का पूरा हिस्सा ऐसी सोच के कारण 'नो-गो एरिया' घोषित कर रखा है। हमने ही समुद्र के अंदर जाकर अन्वेषण न करने का निर्णय कर लिया था। ये सोच का दायरा था। हमने फैसला किया कि ये नहीं चल सकता। हमने उस 99 प्रतिशत क्षेत्र को 'गो-अहेड एरिया' के रूप में खुला कर दिया है। हम समुद्र के भीतर भी नए-नए भंडार खोजने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
सेमीकंडक्टर प्लांट को लेकर क्या बोले पीएम?
पीएम ने संबोधन में कहा कि देश आजाद होने के बाद विश्व में सेमीकंडक्टर की चर्चा हो चुकी थी। हमारे यहां भी बातें होती थी लेकिन सेमीकंडक्टर का कोई बड़ा प्लान हम आगे नहीं बढ़ा पाए। पीएम ने कहा कि, आज की डिजिटल दुनिया और तकनीक में हम चिप का महत्व समझते हैं। कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान होगा, हर किसी में चिप अनिवार्य है। इसके बिना दुनिया थम जाए ऐसी स्थिति पैदा होती है। इसलिए भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में अपना सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया है। 3 प्लांट शुरू हो गए हैं। आने वाले 7-8 साल में और प्लांट शुरू होने वाले हैं।"
एनर्जी सेविंग पर भी पीएम मोदी ने संबोधन में की चर्चा
लाल किले से आज पीएम मोदी ने अपने संबोधन में एनर्जी सिक्योरिटी की बात कही। पीएम ने कहा कि हमें वैकल्पिक स्रोतों की ओर भी अपनी ताकत लगानी चाहिए। इसलिए ऊर्जा का सही इस्तेमाल बढ़ाते हुए भारत इसी दिशा में आज तेजी से काम कर रहा है। 2014 से पहले मतलब आज से 12 साल पहले, हमारे देश में केवल 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी। 12 साल में इन 70 शहरों को हमने 700 शहरों तक पहुंचा दिया है। ये होती है रफ्तार। 2014 के पहले मुश्किल से 20-22 लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचती थी। आज 1.75 करोड़ घरों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम होता है।
कई लोगों ने किया भारत को डराने का काम
पीएम ने युद्ध की चर्चा करते हुए कहा कि- पिछले 10-12 साल हम लगातार 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए दौड़ रहे हैं। हमने सोचा भी नहीं था कि हमें इसमें भी कुछ मुसीबतों को झेलना पड़ेगा। पिछले 10-12 वर्षों में हमें कितने संकटों का सामना करना पड़ा। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया। सारी अर्थव्यवस्था चरमरा गई। कोरोना से बाहर निकले तो युद्ध की विभीषिका की खबरें आने लगीं। कहीं युक्रेन तो कहीं पश्चिम एशिया। हर जगह तनाव का माहौल। और पता नहीं भविष्यवक्ताओं ने तो क्या-क्या घोषणाएं कर दी थीं। देश को डराना, देश को भयभीत करना, देश को चिंतित रखना, इसी में कई लोगों को आनंद आता है। सारी दुनिया भर की अफवाहें फैलाकर, भारत के लोगों को भयभीत करने का, डराने कर, चिंता में डुबो देने में कुछ लोगों को आनंद आ रहा था लेकिन देश ने देख लिया कि पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं रंग ला रही हैं और हम इतने बड़े संकट के बावजूद भी नागरिक देवो भव: के मंत्र को लेकर जीते हुए, भारत ने जो तैयारियां की थीं, एक के बाद एक कदम उठाया था, सोचा नहीं था कि ये संकट आएगा लेकिन संकट के समय में ये सारी चीजें काम आ गई और आज देश में गैस भी है, पेट्रोल भी है, यूरिया भी है।
Written By: MADHVI TANWAR