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सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की धमकी, उमर अब्दुल्ला ने शहबाज शरीफ को दिया करारा जवाब
Omar Abdullah Statement: सिंधु जल समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। शहबाज शरीफ की धमकी के बाद उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने इस समझौते की भारी कीमत चुकाई है। जानिए पूरा विवाद, इतिहास और दोनों देशों के बीच बढ़ती तल्खी।
Omar Abdullah Statement on Indus Water Treaty: सिंधु जल समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भारत द्वारा अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को चेतावनी दी थी। अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के इस बयान पर तीखा पलटवार किया है।
शहबाज शरीफ ने कहा था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा और अगर पानी रोकने की कोशिश की गई तो पाकिस्तान इसका जवाब देगा। उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारत पर कई आरोप भी लगाए।
उमर अब्दुल्ला बोले- सिंधु समझौते की भारी कीमत जम्मू-कश्मीर ने चुकाई
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सिंधु जल समझौते के कारण जम्मू-कश्मीर को लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ा है।उन्होंने कहा कि जिन नदियों पर सबसे पहला अधिकार जम्मू-कश्मीर का था, उन्हीं के पानी के इस्तेमाल को लेकर राज्य को कई सीमाओं का सामना करना पड़ा। उमर ने कहा कि यह समझौता अब खत्म हो चुका है और इसे दोबारा लागू नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने पाकिस्तान के कश्मीरियों के प्रति समर्थन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकारों और संसाधनों की बात आती है तो पाकिस्तान की कथित हमदर्दी सामने नहीं आती।
अपनी ही चिनाब नदी का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सिंधु जल समझौते के कारण जम्मू-कश्मीर कई विकास परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ा सका। उन्होंने चिनाब नदी और तुलबुल परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य को अपने ही संसाधनों के इस्तेमाल में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।उन्होंने साफ कहा कि जल समझौते को लेकर जम्मू-कश्मीर की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अब इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार होना चाहिए।
राज्य का दर्जा बहाली को लेकर केंद्र पर निशाना
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग भी दोहराई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने वादे का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से किया गया वादा है। उमर ने संकेत दिया कि इस मांग को लेकर उनकी पार्टी आगे भी अपनी आवाज उठाती रहेगी।
क्या है सिंधु जल समझौता?
सिंधु जल समझौता वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत छह प्रमुख नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था।इस समझौते में पूर्वी नदियां- रावी, ब्यास और सतलुज का नियंत्रण भारत को मिला, जबकि पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को स्थगित कर दिया था। भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद खत्म होने तक इस समझौते पर सामान्य स्थिति बहाल नहीं की जाएगी
Written By: Shivashakti Narayan SINGH
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