Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पीपलकोटी की टीएचडीसी (THDC) जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। शाम करीब 7 बजे टनल के भीतर अचानक हुए भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस गया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर फंस गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हताहतों का विवरण और रेस्क्यू स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। टनल में फंसे मजदूरों में से 21 को बाहर निकाल लिया गया है। 7 मजदूरों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया है, जबकि 14 मजदूर घायल हैं। 3 मजदूरों का अब भी कोई सुराग नहीं मिला है, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
टनल में अत्यधिक पानी और मलबा जमा हो जाने के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पानी निकालने और मलबा हटाने के लिए लगातार मशीनें लगाई गई हैं।
घायलों का इलाज और श्रमिकों की पृष्ठभूमि
हादसे में घायल हुए मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, 11 घायल मजदूरों का इलाज जारी है (इनमें से 1 गंभीर रूप से घायल मजदूर को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है)। 1 घायल मजदूर का इलाज चल रहा है। सुरंग में काम करने वाले मजदूर मुख्य रूप से पंजाब, बिहार और झारखंड के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी की नजर, प्रबंधन पर उठे सवाल
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून स्थित राज्य आपदा कंट्रोल रूम से राहत और बचाव कार्यों की पल-पल की निगरानी कर रहे हैं। वहीं, जिले के प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने रात में ही घटनास्थल पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया।
आपदा परिचालन केंद्र, देहरादून पहुंचकर मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 13, 2026
टनल में फंसे 22 श्रमिकों में से अब तक 16 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शेष… pic.twitter.com/4QZ8I8lHSB
इस दर्दनाक हादसे के बाद टीएचडीसी (THDC) प्रबंधन की कार्यप्रणाली और टनल में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शुरुआती स्तर पर परियोजना प्रबंधन की लापरवाही की संभावना जताई जा रही है, जिस पर प्रशासन ने निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
Written by Shailesh Yadav