Delhi University: दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा को लेकर बड़ी खबर है। अब चार साल का ग्रेजुएशन पूरा करने वाले योग्य छात्रों को मास्टर डिग्री किए बिना सीधे PhD में दाखिला लेने का मौका मिलेगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 2026 में अपने चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) पूरा करने वाले छात्रों के लिए यह विशेष व्यवस्था की है।
कब शुरू हुआ 2 वर्षीय स्नातक कार्यक्रम
डीयू की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) का पहला बैच शैक्षणिक सत्र 2022-23 में शुरू किया गया था। साल 2022 में शुरू हुआ ये बैच इस साल पूरा हो रहा है। इसमें कुल 75,948 छात्रों ने दाखिला लिया था। जिसमें से साल 2025 में 40,005 छात्रों ने तीन साल की डिग्री प्राप्त की थी, जबकि 35,943 छात्रों ने चार साल की डिग्री पूरी करने का विकल्प चुना था।
क्यों शुरू हुई यह व्यवस्था
डीयू की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक इस व्यवस्था की शुरुआत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए की गई है। 4 वर्षीय स्नातक पूरा करने के बाद छात्र सीधा पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे। इसके अलावा, डीयू की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पीएचडी में दाखिला लेने के लिए छात्रों को मास्टर पूरा करना अनिवार्य नहीं है।
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कितने नंबर जरूरी?
सीधे PhD में प्रवेश के लिए चार वर्षीय ग्रेजुएशन में कम से कम 7.5 CGPA हासिल करना जरूरी है। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए है जिन्होंने DU के चार वर्षीय UG प्रोग्राम को पूरा किया है।
MA या MSc करने की जरूरत नहीं
आमतौर पर PhD में दाखिले के लिए छात्रों को पहले पोस्टग्रेजुएशन करना पड़ता है। लेकिन इस विशेष प्रावधान के तहत पात्र FYUP छात्र मास्टर डिग्री किए बिना सीधे PhD के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे छात्रों का एक साल या उससे अधिक समय बच सकता है।
किन छात्रों को मिलेगा फायदा?
* दिल्ली यूनिवर्सिटी के चार वर्षीय UG/FYUP प्रोग्राम के 2026 बैच के छात्र
* निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करने वाले विद्यार्थी
* 7.5 CGPA या उससे अधिक हासिल करने वाले पात्र छात्र
* संबंधित PhD कार्यक्रम की अन्य शर्तें पूरी करने वाले उम्मीदवार
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यह व्यवस्था क्यों की गई?
DU का चार वर्षीय UG प्रोग्राम नई शिक्षा नीति के तहत लागू किया गया है। 2026 में इसका पहला बैच ग्रेजुएट हुआ है। ऐसे छात्रों के लिए DU ने PhD में सीधे प्रवेश का रास्ता खोलने का फैसला किया है। इसे फिलहाल 2026-27 के लिए एक विशेष/वन-टाइम व्यवस्था के तौर पर बताया गया है।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
पहले तीन साल की सामान्य ग्रेजुएशन के बाद छात्रों को मास्टर डिग्री करनी पड़ती थी। अब चार वर्षीय UG प्रोग्राम पूरा करने वाले योग्य छात्रों को रिसर्च के क्षेत्र में सीधे आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि PhD में प्रवेश केवल CGPA के आधार पर स्वतः नहीं होगा; उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया और संबंधित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।
नोट: UGC के नियमों के तहत भी चार वर्षीय UG डिग्री वाले छात्रों के लिए न्यूनतम 75% या समकक्ष ग्रेड के साथ PhD/NET का रास्ता उपलब्ध है। DU की वर्तमान व्यवस्था में 7.5 CGPA की पात्रता शर्त बताई गई है।