Viral Fever vs Flu: मौसम बदलने के साथ बुखार, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। कई बार लोग सामान्य वायरल फीवर और फ्लू को एक ही बीमारी समझ लेते हैं। हालांकि दोनों के लक्षण काफी हद तक मिलते-जुलते हैं, लेकिन उनकी शुरुआत और लक्षणों की तीव्रता में अंतर हो सकता है। ऐसे में कुछ संकेतों की मदद से इनके बीच फर्क समझा जा सकता है।
सामान्य वायरल फीवर और फ्लू में क्या अंतर है?
सामान्य वायरल संक्रमण में लक्षण अक्सर धीरे-धीरे दिखाई दे सकते हैं। हल्का बुखार, नाक बहना, गले में खराश, खांसी और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं।वहीं फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा में लक्षण कई बार अचानक और ज्यादा तीव्रता के साथ शुरू होते हैं। तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर में तेज दर्द, सूखी खांसी और अत्यधिक थकान फ्लू में ज्यादा देखने को मिल सकती है।
इन लक्षणों पर दें ध्यान
* बुखार: फ्लू में बुखार तेज हो सकता है।
* शरीर में दर्द: फ्लू में मांसपेशियों और शरीर में दर्द ज्यादा हो सकता है।
* थकान: फ्लू में कमजोरी और थकान कई दिनों तक रह सकती है।
* खांसी: दोनों में खांसी हो सकती है, लेकिन फ्लू में सूखी खांसी ज्यादा परेशान कर सकती है।
* नाक और गला: वायरल संक्रमण में नाक बहना और गले में खराश आम है।
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घर पर क्या करें ताकि खतरा कम रहे?
बीमारी के दौरान शरीर को आराम देना और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना सबसे जरूरी है। पानी, सूप और जरूरत के अनुसार ओआरएस जैसे तरल पदार्थ लेते रहें। खाने में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। पर्याप्त नींद लें और ज्यादा मेहनत या व्यायाम से कुछ समय बचें। बुखार या दर्द के लिए पैरासिटामोल जैसी दवा ली जा सकती है, लेकिन इसे पैक पर दिए निर्देशों या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक शुरू न करें, क्योंकि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक आमतौर पर काम नहीं करते।
दूसरों में संक्रमण फैलने का खतरा कम करने के लिए खांसते या छींकते समय मुंह ढकें, हाथ नियमित रूप से धोएं और बीमारी के दौरान करीबी संपर्क कम रखें।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी, भ्रम या बेहोशी, शरीर में पानी की कमी या लगातार बिगड़ते लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
ध्यान रखें: केवल लक्षणों के आधार पर वायरल फीवर और फ्लू की पक्की पहचान हमेशा संभव नहीं होती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच या फ्लू टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।