बीजिंग : चीन में कैथोलिक धार्मिक गतिविधियों पर कथित रूप से नई पाबंदियां लगाई जा रही हैं। शंघाई और बीजिंग के कैथोलिक समुदायों का कहना है कि पिछले एक साल में धार्मिक गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध और कड़े किए गए हैं।
द एप्पोक टाइम्स (TET) की रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रतिबंधों का असर बाइबल और अन्य धार्मिक साहित्य की बिक्री, धार्मिक यात्राओं, ऑनलाइन प्रार्थना प्रसारण और कैथोलिक अंतिम संस्कार की रस्मों पर पड़ा है।
कैथोलिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार पर रोक
रिपोर्ट के मुताबिक, शंघाई में 18 अगस्त को एक नया आदेश लागू किया गया, जिसके तहत शहर के अंतिम संस्कार केंद्रों में कैथोलिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने पर रोक लगा दी गई है। इस जानकारी को एक चीनी असंतुष्ट नेता ने 19 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया।
शंघाई के प्रसिद्ध सेंट इग्नाटियस कैथेड्रल की धार्मिक सामग्री की दुकान में अब कथित तौर पर बाइबल, प्रार्थना पुस्तकें और धार्मिक अध्ययन से जुड़ी किताबें बेचना बंद कर दिया गया है।
धार्मिक साहित्य की बिक्री पर रोक
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कैथोलिक श्रद्धालुओं ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उन्हें संभावित कार्रवाई का डर है। शंघाई के एक कैथोलिक श्रद्धालु झांग ने बताया कि पिछले साल से ही धार्मिक किताबें धीरे-धीरे दुकानों से हटने लगी थीं।
झांग के अनुसार, दुकान के कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं से कहा था कि अगर उन्हें कोई धार्मिक सामग्री खरीदनी है तो जल्दी खरीद लें, क्योंकि भविष्य में ये उपलब्ध नहीं रहेंगी। इसके बाद धार्मिक किताबें और अन्य सामग्री दुकान से हटा दी गईं।
सेंट इग्नाटियस कैथेड्रल में प्रवेश पर रोक
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि प्रतिबंध केवल धार्मिक साहित्य तक सीमित नहीं हैं। शंघाई के सेंट इग्नाटियस कैथेड्रल में आम लोगों के प्रवेश पर भी कथित तौर पर रोक लगाई गई है। एक श्रद्धालु झू ने बताया कि कैथेड्रल का मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया है और अब केवल श्रद्धालुओं को ही एक अलग रास्ते से प्रवेश की अनुमति है।
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इसी तरह बीजिंग में भी ऐसी ही स्थिति सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी के कुछ कैथोलिक चर्चों ने भी बाइबल की बिक्री बंद कर दी है।
चीन में धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध
कैथोलिक समुदाय के लोगों के मुताबिक, चीन में धार्मिक गतिविधियों पर लगाए जा रहे ये प्रतिबंध अब केवल धार्मिक पुस्तकों और चर्चों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धार्मिक यात्राओं, ऑनलाइन प्रार्थना और अंतिम संस्कार जैसी परंपराओं को भी प्रभावित कर रहे हैं।