Pakistan: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में कथित जबरन गुमशुदगी के मामलों ने एक बार फिर मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केच और मस्तुंग जिलों में अलग-अलग घटनाओं के दौरान आठ लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लेकर लापता कर दिया गया। इन घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, एक अन्य लापता व्यक्ति के घर लौटने की खबर भी सामने आई है।
बलूचिस्तान में आठ लोगों के लापता होने का मामला क्या है?
द बलूचिस्तान पोस्ट की 20 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, केच जिले के तुम्प इलाके के कोहाद में रविवार रात कई घरों पर कथित छापेमारी की गई। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि इस दौरान चार लोगों को हिरासत में लिया गया। उनकी पहचान बिलाल, साबित, मरवान और आदिल के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद से उनके ठिकाने की जानकारी नहीं मिल पाई है।
स्थानीय सूत्रों ने छापेमारी के दौरान घरों से आभूषण, मोटरसाइकिल और अन्य सामान ले जाने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
पाक आर्मी का असली चेहरा आया सामने
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी लंबे समय से एक संवेदनशील मानवाधिकार मुद्दा रहा है। बलूचिस्तान यकजहती कमेटी (BYC) और अन्य मानवाधिकार समूह समय-समय पर आरोप लगाते रहे हैं कि प्रांत में लोगों को हिरासत में लेने के बाद उनके परिवारों को उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी जाती।
BYC के मानवाधिकार विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के 507 कथित मामले दर्ज किए गए। संगठन का दावा है कि इनमें से 303 लोग रिपोर्ट तैयार किए जाने तक लापता थे।