nigeria convoy attack: पूर्वोत्तर नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में संदिग्ध बोको हराम के आतंकियों ने सैना के काफिले पर आत्मघाती हमला कर दिया है। इसमें हमले में गंबोरू नगाला और पड़ोसी देश कैमरून के बीच सड़क पर गश्त कर रहे सैनिकों के काफिले को निशाना बनाया गया। इस हमले में 10 नाइजीरिया सैनिक और 5 'सिविलियन ज्वॉइंट टास्क फोर्स' के सदस्य शामिल हैं। हमलावरों के वाहन ने सड़क किनारे बिछाए गए लैंडमाइन को टक्कर मारी, इसमें 8 सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद छिपे हुए हथियारबंद आतंकियों ने दूसरे वाहन पर अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें 6 सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए। मैदुगुरी के मैमालारी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आतंकवादियों ने सैनिकों से हथियार और नकदी भी लूट ली। इस हमले ने एक बार फिर से बीते वर्ष हुए आत्मघाती हमले की यादें ताजा कर दी हैं।

बीते वर्ष साल 2025 में भी हुआ था ऐसा ही हमला

नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में साल 2025 में भी जिहादी फिदायीन हमला हुआ था। जिसमें कम से कम 27 नाइजीरियाई सैनिक मारे गए थे। इस संघर्ष को तकरीबन 16 साल हो चुका है, जिसमें लगभग 60,000 लोग मारे गए् थे। तकरीबन 20 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। हिंसा ने नाइजीरिया के पड़ोसी देशों, जैसे नाइजर, चाड और कैमरून, में भी अपना आतंकी असर छोड़ा था। इसके परिणामस्वरूप इन देशों ने आतंकवादियों से लड़ने के लिए क्षेत्रीय बल का गठन पहले ही कर लिया था। लेकिन उसके बावजूद भी लगातार हो रहे आतंकी हमले बढ़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।

भारत के आगे चुनौती

नाइजीरिया में हुए इस तरह के आतंकी हमले के बाद सवाल यह उठता है कि क्या भारत के लिए भी इससे खतरा हो सकता है। क्योंकि भारत पर पहले ही पड़ोसी देश पाकिस्तान और बंगलादेश जैसे देश पहले की चुनौती बने हुए हैं। पाकिस्तान से लगातार घुसबैठ और आतंकी हमलों की साजिश को भारत पहले ही कई बार नाकाम कर चुका है। लेकिन किसी विदेशी हमले से लड़ने के लिए भारत कितना तैयार है। आतंकवाद-विरोधी सहयोग, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और अफ्रीका में भारतीय नागरिकों तथा आर्थिक हितों की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर चर्चा की जा सकती है। हालांकि, इस घटना से भारत को सीधा खतरा नहीं है।

भारत पर नहीं पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

बोर्नो में बोको हराम और ISWAP के आतंकियों द्वारा नाइजीरियाई सेना के काफिले और बेस पर हुए हमले के बाद नाइजीरिया में आंतरिक सुरक्षा संकट में है, फिर भी वैश्विक रूप से जुड़े होने के कारण भारत पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

नाइजीरिया में रहने वाले भारतीय को लेकर चिंता

नाइजीरिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग रहते हैं। जो वहां की कंपनियों, व्यापार और उद्योगों में कार्यरत हैं। पूर्वोत्तर नाइजीरिया में बढ़ते आतंकी हमलों और देश के अन्य हिस्सों में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों के कारण वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।

वैश्विक आतंकवाद की बढ़ा सकता है चुनौती

बोको हराम और ISIS से जुड़े संगठन वैश्विक जिहादी नेटवर्क का हिस्सा हैं। अफ्रीका में इन संगठनों का मजबूत होना वैश्विक आतंकवाद की चुनौती को बढ़ाता है, क्योंकि भारत खुद आतंकवाद से पीड़ित रहा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर किसी भी आतंकी नेटवर्क का विस्तार भारत के लिए चिंता का विषय होता है।

भारत करेगा मदद

इस स्थिति की गंभीरता स्थिति को देखते हुए भारत और नाइजीरिया ने द्विपक्षीय स्तर पर सहयोग तेज कर दिया। अक्टूबर 2026 में ही नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आतंकवाद विरोधी संवाद आयोजित हुआ। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और उनके नाइजीरियाई समकक्ष नूहू रिबाडू ने आतंकवाद, चरमपंथ, साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

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