India-US Trade Deal: कंगाल पाकिस्तान और चालाक चीन के जल्द होश उड़ने वाले है। दुनिया के नक्शे पर एक नए आर्थिक पटकथा का अध्याय शुरू होने जा रहा है। हम बात कर रहे India-US Trade Deal के बारे में, मीडिया से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच जल्द डील पूरी होने की बात कही है।

पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है। सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका के साथ मिलकर भारत चीन की टेंशन बढ़ाने वाला है और क्या एशिया में एक नया आर्थिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। आइए समझते है कि क्या है पूरा खेल।

India-US Deal भारत के लिए साबित होगा गेमचेंजर

बीते कई महीनों से भारत और अमेरिका के ट्रेड डील को लेकर लगातार बातचीत जारी है। आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम जानकारी दी है, मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “वे एक समझौता करना चाहते हैं। हम एक समझौता करने जा रहे हैं।

हम काफी करीब हैं, हाँ।” “मैं कहूँगा कि हम समझौते के लगभग उतने ही करीब हैं, जितना कि बिना किसी लिखित करार के हो सकते हैं। मुझे लगता है कि बस कुछ ही छोटी-मोटी चीजें बाकी हैं जिन्हें निपटाना है।” यानि यह तो साफ है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कुछ अच्छा होने जा रहा है।

चीन को पछाड़ भारत बनेगा एशिया का नया किंगमेकर

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चीन को आर्थिक चोट देना है। चीन लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोलर उपकरणों, रसायनों और कई औद्योगिक उत्पादों के वैश्विक कारोबार में मजबूत स्थिति रखता है।

हालांकि उनके सामान को लेकर एक कहावत महत्वपूर्ण है,"चले तो चांद तक, नहीं तो शाम तक", अगर भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर टैरिफ शर्तें और स्थिर बाजार पहुंच मिलती है, तो भारत चीन को सीधी टक्कर दे सकता है। अगर इसके फायदे की बात करें तो -

भारतीय निर्यात को बढ़ावा - कपड़ा, परिधान, दवाइयों, इंजीनियरिंग उत्पादों और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिल सकता है।

कंपनियों के लिए नया विकल्प - अमेरिकी कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत में उत्पादन और सप्लाई चेन का विस्तार करने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, ऐसा निवेश तभी बढ़ेगा जब लागत, बुनियादी ढांचा, कुशल श्रमिक और कारोबारी नियम अनुकूल होंगे।

मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती - अगर नए ऑर्डर भारत की फैक्ट्रियों तक पहुंचते हैं, तो उत्पादन, निवेश और रोजगार को फायदा मिल सकता है।

पाकिस्तान का गेम ओवर!

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तान की क्षेत्रीय और आर्थिक स्थिति है।पाकिस्तान पहले से ही विदेशी कर्ज, महंगाई, सीमित विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक सुधारों जैसी चुनौतियों का सामना करता रहा है।

ऐसे में अगर भारत अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात और निवेश को बढ़ाने में सफल होता है, तो दक्षिण एशिया में दोनों देशों की आर्थिक स्थिति की तुलना नए सिरे से हो सकती है। अगर अमेरिका-भारत की डील हो जाती है तो कहीं ना कहीं पाक को भारत की जरूरत पड़ेगी।

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