H-1B Visa: अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी सांसद रिले मूर (Riley Moore) ने भारतीय और चीनी पेशेवरों को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी कंपनियां स्थानीय युवाओं को नौकरी देने के बजाय कम वेतन पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं।
हालांकि यह नया नहीं है, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद लगातार अमेरिका में रह रहे भारतीयों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले एच-1बी वीजा के फीस में बढ़ोतरी, फिर लगातार भारतीयों पर टिप्पणी करना यह उनकी आदत बन गई है।
भारतीयों को लेकर अमेरिकी सांसद का बेतुका बयान
अमेरिकी सांसद रिले मूर ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि "H-1B और OPT प्रोग्राम एक तरह का घोटाला हैं,जो अमेरिकी कामगारों की जगह सस्ते विदेशी मजदूरों को लाकर उनका हक छीन रहे हैं।
कंप्यूटर साइंस से जुड़ी डिग्री लेने वाले 6.5 लाख अमेरिकी नागरिक हैं, लेकिन उनकी जगह 500,000 H-1B वीज़ा धारकों को रखा जा रहा है, जिनमें से ज़्यादातर चीन और भारत से हैं। यह कोई समझदारी की बात नहीं है। हमें इन घोटाले वाले प्रोग्राम्स को अभी खत्म करना होगा"!
भारतीय पेशेवरों पर क्यों पड़ सकता है असर?
H-1B कार्यक्रम में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में H-1B लाभार्थियों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत थी। इसी वजह से वीजा नियमों में संभावित बदलाव और कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग भारतीय आईटी पेशेवरों, छात्रों तथा तकनीकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।
H-1B और OPT कार्यक्रम क्या हैं?
H-1B अमेरिका का एक अस्थायी कार्य वीजा है, जिसके तहत कंपनियां विशेष कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी पेशेवरों को कुछ निर्धारित नौकरियों के लिए नियुक्त कर सकती हैं। तकनीक, इंजीनियरिंग, शोध और अन्य विशेष क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
दूसरी ओर, OPT यानी Optional Practical Training कार्यक्रम अमेरिका में पढ़ाई करने वाले पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य अनुभव हासिल करने की अनुमति देता है। STEM विषयों के पात्र छात्रों को निर्धारित शर्तों के तहत अतिरिक्त अवधि के लिए भी यह सुविधा मिल सकती है।