बलूचिस्तान/नई दिल्ली: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सशस्त्र संघर्ष के बीच बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने अपने कथित ‘ऑपरेशन अल्मास’ के जारी रहने का दावा किया है। संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने कहा कि अभियान के दौरान पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को नुकसान पहुंचा है, कुछ सुरक्षा ठिकानों पर कब्जा किया गया है और सेना के एक वाहन को नष्ट किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
22 अक्टूबर 2026 को जारी बयानों में BLF ने कई स्थानों पर हमलों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के पीछे हटने का दावा किया। संगठन के अनुसार, अभियान अभी जारी है और इसके समाप्त होने के बाद कथित नुकसान का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने रखा जाएगा।
पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को नुकसान पहुंचाने का दावा
BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने दावा किया कि ऑपरेशन अल्मास के दौरान सैन्य खुफिया विभाग (MI) के एक कैप्टन और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कई जवान मारे गए। संगठन ने यह भी दावा किया कि उसके लड़ाकों ने विभिन्न मोर्चों पर पाकिस्तानी बलों को नुकसान पहुंचाया और कुछ स्थानों से उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर किया।
हालांकि, इन कथित हताहतों और सैन्य गतिविधियों को लेकर पाकिस्तानी सेना की ओर से पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
FWO कैंप और ग्वादर में कार्रवाई का दावा
संगठन के अनुसार, उसके लड़ाकों ने फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के मुख्य कैंप पर कब्जा कर वहां BLF का झंडा फहराया। यह स्थान ग्वादर के जीरो पॉइंट क्षेत्र से संबंधित बताया गया है।
BLF ने मुज्हानी पुलिस स्टेशन पर नियंत्रण हासिल करने, वहां से सरकारी हथियार और सैन्य उपकरण जब्त करने तथा झड़प के दौरान एक पुलिसकर्मी की मौत का भी दावा किया।
इसके अलावा, संगठन ने गुबद क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के एक काफिले पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक सैन्य वाहन को नष्ट करने और कई जवानों के मारे जाने या घायल होने का दावा किया। BLF के मुताबिक, गुबद क्रॉस स्थित पुलिस चेकपोस्ट भी उसके नियंत्रण में था। इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
‘सद्दू ऑपरेशनल बटालियन’ के तहत जारी है अभियान
BLF के एक अन्य बयान के अनुसार, ऑपरेशन अल्मास संगठन की सद्दू ऑपरेशनल बटालियन के तहत चलाया जा रहा है। इस बटालियन का नाम संगठन के वरिष्ठ कमांडर मामो सद्दू मारी के नाम पर रखा गया है, जिन्हें शाहादत मारी के नाम से भी जाना जाता था।
संगठन ने मारी को अपने संस्थापक सदस्यों में शामिल बताया और कहा कि उन्होंने संगठनात्मक ढांचे को स्थापित करने तथा मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
BLF के दावे के अनुसार, बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके में एक कैंप पर पाकिस्तानी बलों के हमले के दौरान मारी ने अपने साथियों को सुरक्षित निकलने का मौका देने के लिए मोर्चे पर रुककर मुकाबला किया था, जिसमें उनकी मौत हो गई। संगठन ने कहा कि बटालियन का नाम उनके सम्मान में रखा गया है।
आत्मघाती हमले में लड़ाके के शामिल होने का दावा
ऑपरेशन से जुड़े एक अन्य बयान में BLF ने मुजाहिद मेहर उर्फ सागर जमुरानी नामक लड़ाके द्वारा विस्फोटकों से भरे वाहन के जरिए एक मजबूत सैन्य कैंप पर आत्मघाती हमला किए जाने का दावा किया।
संगठन के प्रवक्ता के मुताबिक, इस हमले से कैंप की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा और अन्य लड़ाकों को आगे बढ़ने का अवसर मिला। BLF ने मेहर को श्रद्धांजलि देते हुए अपने मारे गए सदस्यों के मिशन को आगे बढ़ाने की बात कही। इस घटना के विवरण की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
16 घंटे तक कैंप पर नियंत्रण का दावा
BLF के प्रवक्ता ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने FWO कैंप पर 16 घंटे से अधिक समय तक नियंत्रण बनाए रखा। संगठन के अनुसार, बख्तरबंद वाहनों में आगे बढ़ रहे पाकिस्तानी सैन्य बलों पर बार-बार हमले किए गए, जिनमें कई जवानों को नुकसान पहुंचा और उन्हें पीछे हटना पड़ा।
प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल BLF के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे थे। संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने कई ड्रोन मार गिराए।
इन घटनाओं के संबंध में स्वतंत्र सत्यापन और पाकिस्तानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
BLF ने कहा- अभियान अभी जारी
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने कहा है कि ऑपरेशन अल्मास अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन के मुताबिक, अभियान पूरा होने के बाद इसकी विस्तृत जानकारी और कथित हताहतों तथा नुकसान का ब्योरा मीडिया को दिया जाएगा।
फिलहाल, ऑपरेशन से संबंधित ज्यादातर विवरण BLF के बयानों पर आधारित हैं। पाकिस्तानी सेना और संबंधित अधिकारियों की स्वतंत्र पुष्टि के अभाव में इन दावों को सत्यापित घटनाक्रम के बजाय संगठन के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
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