Bangladesh: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश की हालत खराब होती जा रही है, बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार अपनी आवाम को जरूरी सुविधाओं को देने में नाकाम हो चुकी है। इस बीच देश की जनता को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (BBS) के एक विशेष सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। चलिए आपको बताते है पूरी खबर
कर्ज के जाल में फंसी आधी आबादी
बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (BBS) के एक विशेष सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में लगभग 47.42 प्रतिशत परिवार (जिनमें से ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में हैं) कर्ज के जाल में फंस गए हैं। इसका कारण यह है कि कमाई स्थिर बनी हुई है, जबकि रहने-सहने का खर्च बहुत तेजी से बढ़ गया है।
बांग्लादेश के 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में ग्रामीण इलाकों के 51.91 प्रतिशत परिवारों, शहरी इलाकों के 40.19 प्रतिशत परिवारों और सिटी कॉरपोरेशन क्षेत्रों के 32.11 प्रतिशत परिवारों ने अपनी बुनियादी जीवन-यापन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उधार लिया। इस विशेष सर्वेक्षण में 150 प्राथमिक सैंपलिंग इकाइयों से 3,000 परिवारों को शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य 'नेशनल पे कमीशन'(राष्ट्रीय वेतन आयोग) की मदद करना था, ताकि वे आगामी नौवें वेतनमान के तहत वेतन वृद्धि के लिए अपनी सिफारिशें तैयार कर सकें।
महंगाई की मार से त्रस्त जनता
विश्व बैंक के ढाका कार्यालय के पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री जाहिद हुसैन ने इस नवीनतम सर्वेक्षण के नतीजों को उस कमजोर व्यापक आर्थिक माहौल का सबूत बताया है, जिसका सामना बांग्लादेश महामारी के बाद से कर रहा है। रिपोर्ट में अर्थशास्त्री के हवाले से कहा गया है, "हाल के वर्षों में आर्थिक विकास दर में लगातार गिरावट आई है।
इसके साथ ही, महंगाई दर भी उच्च स्तर (सिंगल-डिजिट या डबल-डिजिट) पर बनी हुई है, जिसके कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। वहीं, रोजगार की स्थिति स्थिर बनी हुई है, जबकि वास्तविक वेतन में लगातार कमी आई है।"सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में लगातार 56वें महीने महंगाई दर वेतन वृद्धि से अधिक रही है।