UP Vidhansabha Chunav 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। इसी बीच TNP News के खास कार्यक्रम '27 की सत्ता' में हमारी टीम पहुंची गाजीपुर की सदर विधानसभा, जहां जनता से आगामी चुनाव, विकास कार्यों और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को लेकर बातचीत की गई। इस दौरान समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने कहा कि सत्ता में न होने के बावजूद सपा जनता के लिए कई काम कर रही है।

समर्थकों ने दावा किया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेगी और जीत हासिल करेगी। वहीं, कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर भी अपनी राय रखी। राहुल गांधी का जिक्र करते हुए समर्थकों ने कहा कि वे उनके नेता हैं और कांग्रेस भी अच्छा प्रदर्शन करेगी।

वहीं, विकास, वोट चोरी, शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाते हुए समर्थकों ने बीजेपी पर निशाना साधा। अब सवाल यह है कि सदर विधानसभा में जनता किन मुद्दों को सबसे ज्यादा अहमियत दे रही है और 2027 के चुनाव में उसका रुख क्या होगा? देखिए '27 की सत्ता' में गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा से जनता की राय और सियासी माहौल की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट, सिर्फ TNP News पर।


गाजीपुर की सदर विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण

उत्तर प्रदेश की गाजीपुर सदर (Ghazipur Sadar) विधानसभा सीट पर राजनीतिक पार्टियों और स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार मुकाबला मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है। 2022 का चुनाव परिणाम: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के जयकिशन साहू ने भाजपा की डॉ. संगीता बलवंत को बेहद कड़े मुकाबले में 1,692 वोटों के अंतर से हराया था। ऐतिहासिक मिथक: इस सीट का एक अनोखा राजनीतिक इतिहास रहा है कि आजादी के बाद से यहाँ आज तक कोई भी विधायक लगातार दूसरी बार (पुनः) चुनाव नहीं जीत सका है।

राजनीतिक सफर और चुनावी गणित

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने से लेकर संभावित उम्मीदवारों और वोटरों के समीकरण तक पर मंथन कर रहे हैं। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा गाजीपुर जिले की गाजीपुर सदर विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं कि इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का चुनावी इतिहास क्या रहा है।

गाजीपुर सदर सीट का समीकरण

उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला गाजीपुर है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें- जखनियां, सैदपुर, गाजीपुर सदर, जंगीपुर, जहूराबाद, मोहम्मदाबाद और जमानिया शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम गाजीपुर जिले की गाजीपुर सदर विधानसभा सीट की बात करेंगे। गाजीपुर सदर विधानसभा सीट परिसीमन के बाद 1957 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित थी।

यहां के पहले विधायक पब्बर राम बने थे, जिन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। 1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।

गाजीपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

गाजीपुर विधानसभा सीट के पहले यानी की साल 1957 के चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पब्बर राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की सुशीला देवी को 1,045 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पब्बर राम को 17,134 वोट मिले, जबकि सुशीला देवी को 16,089 वोट मिले। पिछली जीत के आंकड़े: 2017 में बीजेपी की संगीता बलवंत यहां से जीती थीं।

2012 में सपा के विजय कुमार मिश्रा यहाँ से विधायक चुने गए थे।

2007 में सपा की सैयदा शादाब फातिमा और 2002 में बसपा के उमाशंकर कुशवाहा विजयी रहे थे।

प्रमुख मुद्दे और स्थिति (2027 दृष्टिकोण)

स्थानीय मुद्दे: शहर की बदहाल सीवर परियोजना, रोजगार के सीमित अवसर और युवाओं का पलायन यहां के मुख्य चुनावी मुद्दे हैं। इसके अलावा अफीम फैक्ट्री, गंगा नदी और सरकारी मेडिकल कॉलेज जैसी संस्थाएं भी क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करती हैं।

दलगत स्थिति: साल 2022 के चुनाव में सपा गठबंधन का गाजीपुर जिले की अधिकतर सीटों पर दबदबा रहा था। वहीं 2027 के आगामी चुनावों को लेकर भाजपा अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटी है, जबकि सपा अपनी सीट बचाने की कोशिश कर रही है।

गाजीपुर सदर विधानसभा का जातीय समीकरण

गाजीपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न जातियों के मतदाता चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। स्थानीय जातीय समीकरण और अनुमानित मतदाता आंकड़े इस प्रकार हैं:

बिंद / मल्लाह: लगभग 20% या 65,000 से 70,000 मतदाता (सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं
यादव: लगभग 10% से 12% या 40,000 से 50,000 मतदाता
दलित: लगभग 12% या 40,000 से 50,000 मतदाता
मुस्लिम: लगभग 12% या 35,000 से 40,000 मतदाता
कुशवाहा (मौर्य / सैनी): लगभग 40,000 मतदाता
राजपूत (क्षत्रिय): लगभग 10% या 35,000 से 40,000 मतदाता
वैश्य / लाला: लगभग 45,000 से 50,000 मतदाता
ब्राह्मण व भूमिहार: संयुक्त रूप से लगभग 10% से 12% (ब्राह्मण 20,000–24,000 और भूमिहार 6,000–8,000)
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): लगभग 40,000 से 50,000 मतदाता

यहां कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.5 लाख से 3.63 लाख के आसपास है। इस सीट पर जीत का अंतर अक्सर बहुत कम रहता है और यहां किसी भी विधायक के लगातार दूसरी बार जीतने का इतिहास नहीं रहा है।

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