UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में चुनावी आगाज हो चुका है। राजनीतिक गलियारों में चुनावी माहौल पूरी तरह रंग दिखा रहा है। तमाम राजनीतिक पार्टियों ने अपनी जीत के दावे करते हुए तैयारियां शुरू कर दी है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी भी लगातार देखी जा रही है।
इस बीच TNP News की टीम पहुंची गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा सीट पर, जहां 2027 के चुनाव और सरकार के कामकाज को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। इस विधानसभा क्षेत्र की संख्या 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से 374 है। जानिए TNP News की इस खास ग्राउंड रिपोर्ट में गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा सीट पर जनता का कैसा है मिजाज?
विधायक अंकित भारती ने सफर के बारे में दी जानकारी
सैदपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अंकित भारती ने भी अपने राजनीतिक सफर के बारे में बताया। उन्होंने साझा किया कि उनकी राजनीति में एंट्री कैसे हुई और वह किस तरह क्षेत्र की जनता से जुड़े रहते हैं। साथ ही, उन्होंने जनता की समस्याओं को सुनने, उनके समाधान के लिए किए जाने वाले प्रयासों और लोगों की मदद करने के अपने तरीके के बारे में भी जानकारी दी।
जनता ने दिखाया विधायक के कामकाज का आईना
सैदपुर की जनता ने महिला सुरक्षा, राशन व्यवस्था, बिजली, पानी, बेरोजगारी, पेपर लीक, सड़कों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। किसी ने सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की सराहना की, तो किसी ने बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। जनता ने विधायक अंकित भारती के कामकाज को लेकर अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने माना कि विधायक ने अच्छे काम कराए हैं और क्षेत्र में पहले के मुकाबले विकास कार्य हो रहे हैं।
सैदपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की सैदपुर (सुरक्षित - SC) विधानसभा सीट पर कुल लगभग 4 लाख मतदाता हैं। इस सीट के जातीय समीकरण में दलित मतदाता सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं, इसके बाद यादव, राजभर, मुस्लिम और कुशवाहा वोटर चुनावी नतीजों को तय करने में अहम माने जाते हैं।
सैदपुर विधानसभा के अनुमानित जातिगत आंकड़े
कुल मतदाता: लगभग 4,00,000 (आरक्षित सीट - एससी)
दलित (SC): लगभग 75,000
यादव: लगभग 70,000
राजभर: लगभग 35,000
मुस्लिम: लगभग 25,000
कुशवाहा: लगभग 22,000
ब्राह्मण: लगभग 20,000
चौहान: लगभग 12,000
बिंद: लगभग 11,000
राजनीतिक स्थिति और समीकरण
सैदपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) से अंकित भारती वर्तमान विधायक हैं, जिन्होंने 2022 के चुनाव में जीत दर्ज की थी। पूर्वांचल के इस इलाके में राजभर और अन्य पिछड़ी जातियों का वोट बैंक काफी निर्णायक माना जाता है।
सैदपुर विधानसभा सीट का इतिहास और राजनीतिक सफर
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की सैदपुर (सुरक्षित - एससी) विधानसभा सीट (क्रमांक 374) पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी (सपा) का दबदबा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के अंकित भारती ने भाजपा के सुभाष पासी को 36,635 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी।
आरक्षित सीट: 2008 के परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हो गई थी। इससे पहले 1952 से 2012 तक यह एक सामान्य सीट हुआ करती थी।
सपा की हैट्रिक: पिछले तीन चुनावों (2012, 2017 और 2022) से इस सीट पर लगातार समाजवादी पार्टी का कब्जा है।
सुभाष पासी का कार्यकाल: नेता सुभाष पासी ने सपा के टिकट पर 2012 और 2017 में लगातार दो बार सैदपुर से जीत हासिल की थी। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और 2022 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, जहाँ उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
युवा विधायक: 2022 के चुनाव में सपा ने 26 वर्षीय अंकित भारती को मैदान में उतारा, जिन्होंने जीत दर्ज कर इतिहास रचा।
प्रमुख राजनीतिक दल: इस सीट पर मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के बीच रहता है।
कैसे बदला था सैदपुर विधानसभा का स्वरूप
सैदपुर विधानसभा एक ऐतिहासिक व पौराणिक जिले की विधानसभा है। साल 1952 से लेकर साल 2012 तक यह विधानसभा सामान्य विधानसभा भी जिसका क्षेत्रफल सैदपुर ब्लाक और वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्रों में था। 60 साल बाद जिले में हुए परिसीमन के बाद 2 विधानसभा सादात और दिलदारनगर का अस्तित्व समाप्त हो गया, एक नई विधानसभा जंगीपुर का सृजन हुआ। साल 2012 में परिसीमन के बाद सैदपुर विधानसभा का क्षेत्रफल वाराणसी से खत्म कर सादात की तरफ आगे बढ़ाया।
यहां से हुई थी शुरूआत
सैदपुर विधानसभा व जखनियां विधानसभा को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। सैदपुर सामान्य विधानसभा में साल 1952 में कमला सिंह, साल 1957 में आत्मा राम पांडेय, साल 1962 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से कमला सिंह, साल 1967 में कांग्रेस पार्टी से आत्मा राम पांडेय, साल 1969 में बीकेडी से राम करन, साल 1974 में कांग्रेस से प्रभुनारायन, साल 1977 में जनता पार्टी से उदय नारायण, साल 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर से राम करन, साल 1985 में लोकदल से रणजीत ने जीत दर्ज की।
साल 1991 में बीजेपी से महेंद्र नाथ पांडे, साल 2002 में बीजेपी के कैलाश नाथ यादव, साल 2004 में समाजवादी पार्टी के राजनाथ यादव, साल 2007 बहुजन समाजवादी पार्टी के दीनानाथ पांडे, साल 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी के सुभाष पासी और साल 2022 में समाजवादी पार्टी के ही अंकित भारती का नाम शामिल था।
अब देखना यह होगा कि इस बार यूपी में सत्ता की सियासत की चाबी इस बार भी बीजेपी के हाथ में रहेगी या फिर मालिक बदल जाएगा और समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की झोली में यूपी की सत्ता आएगी।
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