DND-Faridabad-Sohna Expressway: दिल्ली-NCR में सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। DND-फरीदाबाद-सोहना एक्सप्रेसवे (NH-148NA) दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोहना के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। करीब 59 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इससे दक्षिण दिल्ली और फरीदाबाद की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक तेज रूट मिलेगा। साथ ही आश्रम, कालिंदी कुंज और मथुरा रोड जैसे व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।

30 से 40 मिनट में पूरा हो सकता है सफर
इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली से सोहना और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले यात्रियों को मिल सकता है। मौजूदा व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक के कारण सफर में काफी समय लग जाता है। एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के जरिए यात्रा अधिक सुगम हो सकती है। हालांकि, 30 से 40 मिनट के सफर का दावा वास्तविक शुरुआती बिंदु, ट्रैफिक और रूट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 59 किलोमीटर बताई गई है। इसमें करीब 12 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली और 47 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में है। यह दिल्ली के सराय काले खां स्थित DND फ्लाईवे से शुरू होकर फरीदाबाद बाईपास के रास्ते सोहना के निकट दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और KMP एक्सप्रेसवे के नेटवर्क से जुड़ता है।

आश्रम, कालिंदी कुंज और मथुरा रोड पर घटेगा दबाव
दिल्ली के आश्रम, महारानी बाग और कालिंदी कुंज जैसे इलाकों में रोजाना भारी ट्रैफिक रहता है। नए कॉरिडोर से फरीदाबाद और सोहना की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलने की उम्मीद है। इससे इन व्यस्त सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो सकता है।

फरीदाबाद बाईपास को भी इस परियोजना के तहत अपग्रेड किया गया है। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों को अलग-अलग रूट मिलने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जाम में कितनी कमी आएगी, यह एक्सप्रेसवे के इस्तेमाल और आसपास के जंक्शनों पर ट्रैफिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

सिंगल पिलर पर बना एलिवेटेड कॉरिडोर
इस परियोजना की खासियत इसका एलिवेटेड हिस्सा भी है। दिल्ली में मीठापुर और मदनपुर खादर के आसपास कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में विशेष इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए उपलब्ध सीमित जगह का बेहतर उपयोग किया जा सका है।

ओखला विहार और कालिंदी कुंज के आसपास एक्सप्रेसवे दिल्ली मेट्रो की लाइन के ऊपर से गुजरता है। इसकी ऊंचाई और संरचना इसे इस क्षेत्र की प्रमुख इंजीनियरिंग परियोजनाओं में शामिल करती है।

नोएडा और मयूर विहार के यात्रियों को भी फायदा
DND फ्लाईवे के जरिए इस कॉरिडोर तक पहुंचने वाले नोएडा और पूर्वी दिल्ली के यात्रियों को फरीदाबाद तथा सोहना की दिशा में जाने के लिए बेहतर विकल्प मिल सकता है। इससे दिल्ली के भीतरी हिस्सों से होकर गुजरने की जरूरत कुछ यात्रियों के लिए कम हो सकती है।

भारी और व्यावसायिक वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलने से रिहायशी इलाकों की सड़कों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका असर संबंधित ट्रैफिक नियमों और रूट व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए बन रहा अतिरिक्त लिंक
फरीदाबाद और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त लिंक की भी योजना बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 31.42 किलोमीटर लंबे इस लिंक की अनुमानित लागत 3,630 करोड़ रुपये है। प्रस्तावित मार्ग फरीदाबाद बाईपास के सेक्टर-65 से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेसवे के दयानतपुर क्षेत्र के रास्ते एयरपोर्ट तक पहुंचेगा।

इस लिंक के बनने से फरीदाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम की ओर से जेवर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सकती है। हालांकि, एयरपोर्ट तक 15 से 30 मिनट में पहुंचने का दावा लिंक के पूरा होने, शुरुआती स्थान और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगा।

तीन पैकेज में विकसित किया गया एक्सप्रेसवे
इस परियोजना को तीन प्रमुख हिस्सों में विकसित किया गया है। पहला हिस्सा DND फ्लाईवे से जैतपुर तक करीब 9 किलोमीटर का है। दूसरा हिस्सा जैतपुर से फरीदाबाद के सेक्टर-65 तक लगभग 24 किलोमीटर लंबा है। तीसरा हिस्सा सेक्टर-65 से सोहना के पास KMP एक्सप्रेसवे तक करीब 26 किलोमीटर का बताया गया है।

इस कॉरिडोर का दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ाव लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए भी अहम है। यहां से वाहन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए राजस्थान और आगे मुंबई की दिशा में जा सकते हैं। वहीं, दूसरे रूट से गुरुग्राम और सोहना की ओर पहुंचना आसान हो सकता है।

प्रदूषण और रियल एस्टेट पर भी पड़ सकता है असर
एक्सप्रेसवे के खंभों पर वर्टिकल गार्डनिंग और रिहायशी इलाकों के पास नॉइज बैरियर जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य आसपास के वातावरण और शोर के प्रभाव को कम करना है। वहीं, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से फरीदाबाद, नोएडा और दक्षिण दिल्ली के आसपास आर्थिक गतिविधियों तथा रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलने की संभावना है। 

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