दरभंगा: हिन्द स्वराज पीठ, दरभंगा की ओर से आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और गांधीवादी विचारों को समाज तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ। अंतिम दिन छात्र-छात्राओं ने महात्मा गांधी की कालजयी कृति ‘हिन्द स्वराज’ की प्रासंगिकता पर चर्चा की और गांधी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया।
विद्यार्थियों ने ‘हिन्द स्वराज’ की प्रासंगिकता पर रखे विचार
शिविर के अंतिम दिन प्रियंका कुमारी, मो. अरमान नूरी, नाजिम मंसूरी, सबीहा नाज़, नेहा कुमारी, रेशमी कुमारी और वंदना कुमारी ने चर्चा में सक्रिय भागीदारी की। विद्यार्थियों ने ‘हिन्द स्वराज’ को केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन, समाज और मानवीय संबंधों को बेहतर बनाने वाली विचार-दृष्टि के रूप में समझने का प्रयास किया। उन्होंने गांधीवादी मूल्यों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिविर आयोजित करने का सुझाव
विद्यार्थियों ने सुझाव दिया कि गांधी के विचारों और ‘हिन्द स्वराज’ की समकालीन प्रासंगिकता पर आधारित प्रशिक्षण शिविर प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में आयोजित किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को गांधी के विचारों को समझने, उन पर सवाल उठाने, चर्चा करने और उन्हें अपने जीवन से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने गांधीवादी चिंतन के प्रसार के लिए परिचर्चा, वाद-विवाद, निबंध लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
सत्य, अहिंसा और सद्भाव से बेहतर समाज की कल्पना
चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने ऐसे समाज की कल्पना प्रस्तुत की, जहां सभी लोग खुशहाल हों, आपसी प्रेम और सद्भाव बना रहे तथा कोई किसी का अहित न चाहे। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और खुशहाली के लिए केवल भौतिक विकास पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लोगों के विचारों, व्यवहार और दूसरों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव भी जरूरी है।
सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता, आत्मानुशासन और परस्पर सम्मान जैसे मूल्यों को अपनाकर बेहतर समाज की नींव रखी जा सकती है।
युवाओं की भागीदारी को बताया महत्वपूर्ण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य ‘हिन्द स्वराज’ के माध्यम से गांधी के विचारों को समकालीन सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ना और नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व, आत्मानुशासन तथा मानवीय संवेदना के महत्व को समझना था।
शिविर में विद्यार्थियों की भागीदारी ने गांधीवादी विचारों को नई पीढ़ी के अनुभवों और सवालों के साथ जोड़ने की संभावनाओं को सामने रखा। चर्चा में यह विचार उभरा कि युवाओं को संवाद और रचनात्मक गतिविधियों के केंद्र में रखकर गांधी के विचारों को समाज में जीवंत बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर शोभा शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने शिविर में शामिल वक्ताओं, विद्यार्थियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।शिविर का समापन गांधी के विचारों को शैक्षणिक संस्थानों से समाज तक पहुंचाने और प्रेम, शांति, सद्भाव तथा सम्मान पर आधारित समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।
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