Haryana Employees Protest: हरियाणा में इस समय बिजली के संकट का खतरा मंडरा रहा है। हरियाणा बिजली विभाग के करीब 40 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल से बिजली उपभोगताओं को दोहरा संकट झेलना पड़ेगा, जिसमें रात के समय बिजली की कटौती तो होगी ही दूसरा संकट पानी का है। क्योंकि बिजली ही नहीं होगी पानी कैसे आएगा।

अब आपको बता दें कि आखिर किस वजह से कर्मचारियों ने इस हड़ताल की घोषणा की है। दरअसल 2 दिन पहले हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर कंपनी को पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस मतलब प्राइवेटाइजेशन का आदेश दे दिया था। इसके बाद से बिजली कर्मियों ने इसका विरोध किया। बिजली कर्मियों ने एचईआसी के उस आदेश की प्रति जलाकर विरोध किया।

ब्लैकआउट जैसे हालात

हरियाणा में 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण राज्य के कई हिस्सों में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है। दीपावली से ठीक पहले करीब 40,000 नियमित, अनुबंधित और आउटसोर्स कर्मचारी व इंजीनियर्स इस आंदोलन में शामिल हैं, जिससे गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, करनाल और अंबाला सहित 15 से अधिक जिलों में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए हैं।

निजी कंपनी को बिजली वितरण

हरियाणा बिजली विभाग ने निजी कंपनी को बिजली वितरण के अ​धिकार देने के आदेश जारी किए। जिसके बाद कर्मचारियों ने एचईआरसी के ​खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 40 हजार कर्मचारियों ने आज यानी 23 अक्तूबर को हड़ताल का ऐलान किया था। हरियाणा बिजली विभाग के कर्मचारियों ने पहले ही बिजली सप्लाई बंद कर दी है।

जिसके बाद 24 घंटे से भी ज्यादा समय से हरियाणा अंधेरे में डूबा हुआ है। बिजली विभाग के कर्मचारी ने हड़ताल के नाम पर बिजली सप्लाई बंद कर दी है। हरियाणा की जनता खासकर ग्रामीण क्षेत्रों पूरा दिन बत्ती गुल रही। इन सब परिस्थितियों को देखकर प्राइवेट बिजली सप्लाई का विकल्प बेहद जरूरी है।

बिजली विभाग को हजारों करोड़ का घाटा

आम जनता की मांग है कि, हरियाणा सरकार को कड़ा एक्शन लेना होगा नहीं तो ये बार बार जनता को परेशान करेंगे। अगर यह बिजली नहीं चालू करते है, तो इन्हें घर बैठाओ और नौकरी से निकालो। हरियाणा में नौकरी के लिये ITI,डिप्लोमा होल्डर हजारों बेरोजगार युवा लाइन में है। उनको मौका मिले ये बिजली विभाग को हजारों करोड़ रुपए घाटे में लाने के जिम्मेदार बिजली विभाग के भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारी है।

कांट्रैक्ट पर लगे कर्मचारी फील्ड में काम करते है पक्के सरकारी कर्मचारी बाबू बनकर दफ्तर में बैठे है रेवाड़ी में 160 करोड़ रुपये बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिये आए थे कहा गए? आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार खंबे जर्जर हालत में है।

सरकार का रुख और कदम

सरकार कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील कर रही है और खुद को इस निजीकरण के फैसले के खिलाफ बता रही है। नियामक के फैसले को चुनौती देने की बात करें तो। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया कि HERC एक स्वायत्त संस्था है और यह फैसला केंद्र सरकार के कानून के तहत लिया गया है। राज्य सरकार इस लाइसेंस के खिलाफ है और इसके विरोध में एपिलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में अपील दायर कर स्टे (रोक) लगाने की मांग कर रही है।

कर्मचारियों को सरकार ने दिया न्योता

कर्मचारियों को साथ आने का भी सरकार ने न्योता दिया है। सरकार ने कर्मचारी संगठनों से अपील की है कि वे हड़ताल का रास्ता छोड़कर सरकार के साथ आएं और इस कानूनी लड़ाई में सरकारी वकीलों की मदद करें। वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर बात करें तो बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं को बहाल रखने के लिए प्रशासन ने पुलिस बल तैनात किया है और वैकल्पिक व निजी कामगारों के जरिए आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि जमीनी स्तर पर यह नाकाफी साबित हो रहा है।

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