23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार के दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि (दोपहर 02:36 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि) और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है।

पंचांग मुख्य विवरण

तिथि: शुक्ल द्वादशी (दोपहर 02:36 बजे तक, तत्पश्चात त्रयोदशी)
नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद (रात्रि 09:03 बजे तक, उसके बाद उत्तराभाद्रपद)
योग: ध्रुव योग (रात्रि 10:09 बजे तक)
करण: बालव करण (दोपहर 02:36 बजे तक)
वार: शुक्रवार (शुक्र प्रदोष व्रत)
सूर्योदय: प्रातः 06:27 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:44 बजे

आज का व्रत 

 पापांकुशा एकादशी व्रत पारण और शुक्र प्रदोष व्रत

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 12:58 बजे से दोपहर 02:35 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:45 बजे से प्रातः 05:36 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 बजे से दोपहर 02:43 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:44 बजे से सायं 06:09 बजे तक

अशुभ समय / राहुकाल

राहुकाल: प्रातः 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 07:51 बजे से प्रातः 09:16 बजे तक
यमगंड: दोपहर 02:54 बजे से सायं 04:19 बजे तक
दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:42 बजे से प्रातः 09:27 बजे तक और दोपहर 12:28 बजे से दोपहर 01:13 बजे तक

राहुकाल में क्या न करें

किसी निश्चित कार्य या उद्देश्यपूर्ण क्रियान्वयन के लिए यह अवधि उपयुक्त है। राहु काल में नए कार्य शुरू करने से बचें।

धार्मिक महत्व

शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र-जप भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि TNP News नहीं करता है)

यह भी पढ़ें: 23 अक्टूबर का राशिफल: किसकी चमकेगी किस्मत, किन राशियों की जेब में आएगा पैसा?