उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के मदरसों में शुक्रवार यानी जुमे की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश देने का फैसला किया है जिसके बाद इस फैसले पर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया है कि जब मदरसे राज्य की समान शिक्षा नियमावली के दायरे में हैं, तो उनमें भी दूसरे शिक्षण संस्थानों की तरह रविवार को ही छुट्टी होनी चाहिए। वही सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए मदरसे और नमाज से जुड़े मुद्दों को बार-बार उठा रही है।
शुक्रवार की जगह रविवार होगी छुट्टी
वही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने मदरसों की साप्ताहिक छुट्टी का दिन बदलने का फैसला शिक्षा व्यवस्था में समानता लाने के लिए किया है। अब तक मदरसों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहता था, जबकि सामान्य स्कूलों में रविवार को छुट्टी होती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि जब मदरसे राज्य की समान शिक्षा नियमावली के दायरे में आते हैं, तो उन पर भी दूसरे शिक्षण संस्थानों की तरह नियम लागू होने चाहिए।
206 मदरसों पर लागू होगी नई व्यवस्था
बता दें कि इस फैसले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में कुल 206 मदरसे इस व्यवस्था के दायरे में हैं। इनमें शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसे और मान्यता के लिए आवेदन कर चुके संस्थान भी शामिल हैं। हालांकि नई व्यवस्था के तहत इन संस्थानों को साप्ताहिक अवकाश के लिए रविवार का नियम अपनाना होगा।
यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है, जब राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता और संचालन को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के बाद अल्पसंख्यक संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था के तहत लाया गया है।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री धामी के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस की वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे अहम मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए बार-बार मदरसे और नमाज से जुड़े मुद्दों को उठाती है।
प्रतिमा सिंह का कहना है कि जब मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक व्यवस्था के तहत लाया जा चुका है, तो सामान्य स्कूलों के नियम लागू होना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने और गैर-जरूरी विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।
शिक्षा में समान नियम या सियासत का नया मुद्दा
मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को छुट्टी करने का फैसला अब शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। सरकार इसे समान नियम लागू करने की पहल बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनता का ध्यान भटकाने और ध्रुवीकरण से जोड़ रही है।
इस पूरे मामले में दो सवाल अहम हैं। पहला, नई व्यवस्था के तहत मदरसों में नियम किस तरह लागू किए जाएंगे और दूसरा, क्या छुट्टी के दिन में बदलाव शिक्षा व्यवस्था तक सीमित रहेगा या यह मुद्दा प्रदेश की सियासत में आगे भी चर्चा का विषय बना रहेगा।
फिलहाल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान और कांग्रेस के पलटवार के बाद उत्तराखंड में मदरसों की छुट्टी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
रिपोर्ट: आकाश
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